DElEd 2nd Semester Science : Chapter-12 : पर्यावरण प्रदूषण
अगर आप DElEd 2nd Semester Science की तैयारी में जुटे हैं, तो Chapter 12 : पर्यावरण प्रदूषण को बिल्कुल भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। यह अध्याय परीक्षा की दृष्टि से बेहद अहम है। इस पोस्ट में आपको इस पूरे चैप्टर की थ्योरी आसान, स्पष्ट और क्रमबद्ध तरीके से समझाई गई है, ताकि हर कॉन्सेप्ट बिना किसी परेशानी के समझ में आ सके।
साथ ही, यहाँ 2015 से 2025 तक के महत्वपूर्ण पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) भी शामिल किए गए हैं, जिससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं और किस टॉपिक पर ज्यादा फोकस करना चाहिए।
इस सामग्री को खास तौर पर इस तरह तैयार किया गया है कि आप कम समय में अधिक से अधिक महत्वपूर्ण बिंदुओं को कवर कर सकें और रिवीजन भी आसानी से कर पाएँ। हर टॉपिक को सरल उदाहरणों और छोटे-छोटे ट्रिक्स के साथ समझाया गया है, जिससे आपकी तैयारी और ज्यादा प्रभावी बन सके।
BTC Wale Bhaiya पर आपको DElEd से संबंधित विश्वसनीय और एग्जाम-ओरिएंटेड स्टडी मटेरियल एक ही जगह व्यवस्थित रूप में मिलता है। यहाँ नोट्स, प्रैक्टिस सेट, पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र और जरूरी टिप्स—all-in-one उपलब्ध हैं, जिससे आपकी तैयारी आसान ही नहीं, बल्कि ज्यादा स्मार्ट भी हो जाती है।
1. पर्यावरण प्रदूषण (Environmental Pollution)
जब पर्यावरण के घटकों (वायु, जल, मृदा) में हानिकारक और अवांछित तत्व मिल जाते हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता कम हो जाती है, तो इसे प्रदूषण कहते हैं।
क. जल प्रदूषण (Water Pollution)
कारण:
- औद्योगिक अपशिष्ट: फैक्ट्रियों से निकलने वाले रसायन।
- घरेलू वाहित मल: घरों का गंदा पानी और सीवेज।
- कृषि रसायन: खेती में उपयोग होने वाले उर्वरक और कीटनाशक।
- अन्य: मृत शवों का विसर्जन और कचरा डालना।
ख. मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)
परिभाषा: मृदा में हानिकारक रसायन, प्लास्टिक या अपशिष्ट मिलने से उसकी उर्वरता नष्ट होना।
- स्रोत: रासायनिक खाद, प्लास्टिक कचरा, औद्योगिक कचरा।
- प्रभाव: फसल उत्पादन में कमी, भूजल का दूषित होना।
- रोकथाम: जैविक खेती अपनाना, वृक्षारोपण करना, कचरे का सही निपटान।
ग. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
परिभाषा: अत्यधिक और अवांछित शोर (जैसे लाउडस्पीकर, हॉर्न, मशीनें)।
- प्रभाव: सुनने की क्षमता में कमी, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा (नींद न आना) और उच्च रक्तचाप।
- विशेष: यह बच्चों की एकाग्रता और मानसिक शांति को भंग करता है।
2. अम्ल वर्षा (Acid Rain)
अम्ल वर्षा मुख्य रूप से दो गैसों के कारण होती है:
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO2)
- नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2)
जब ये गैसें वातावरण में वर्षा के जल के साथ क्रिया करती हैं, तो ये सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं।
- नुकसान: इमारतों का क्षरण (जैसे ताजमहल का पीला पड़ना), मृदा की उर्वरता कम होना और जलीय जीवों को हानि।
3. प्राकृतिक आपदाएं (Natural Disasters)
प्रकृति द्वारा अचानक होने वाली विनाशकारी घटनाएँ।
मुख्य नाम: भूकंप, बाढ़, सूखा, चक्रवात, ज्वालामुखी, सुनामी।
क. भूकंप (Earthquake)
- कारण: पृथ्वी के अंदर टेक्टोनिक प्लेटों का खिसकना, ज्वालामुखी विस्फोट या भारी बाँध निर्माण।
- सुरक्षा के उपाय:
- खुले मैदान में चले जाना।
- मजबूत मेज या बिस्तर के नीचे छिपना।
- बिजली के खंभों और ऊँची इमारतों से दूर रहना।
- भूकंपरोधी मकान बनाना।
ख. ज्वालामुखी (Volcano)
यह पृथ्वी की सतह का वह द्वार है जिससे लावा, गैस और राख बाहर निकलती है।
प्रकार और उदाहरण:
- सक्रिय (Active): जिनमें अक्सर विस्फोट होता रहता है। (उदाहरण: इटली का एटना, हवाई द्वीप का मोना लोआ)।
- प्रसुप्त (Dormant): जो लंबे समय से शांत हैं पर कभी भी फट सकते हैं। (उदाहरण: इटली का विसुवियस, जापान का फ्यूजीयामा)।
- शांत (Extinct): जिनमें भविष्य में विस्फोट की कोई संभावना नहीं है। (उदाहरण: म्यांमार का माउंट पोपा, अफ्रीका का किलिमंजारो)।
ग. आँधी (Storm)
लक्षण:
- आसमान का रंग पीला, भूरा या लाल होना।
- वायुदाब का अचानक कम हो जाना।
- हवा की गति बहुत तेज होना और धूल-रेत का उड़ना।
- तापमान में गिरावट और गरज-चमक के साथ बारिश।
4. आपदा प्रबंधन और सामान्य सुरक्षा उपाय
प्राकृतिक आपदाओं के समय कम से कम नुकसान हो, इसके लिए निम्न कार्य करने चाहिए:
- पूर्व चेतावनी: रेडियो या टीवी पर मौसम विभाग की चेतावनी सुनें।
- आपातकालीन किट: प्राथमिक उपचार (First Aid), टॉर्च, सूखा भोजन और पानी तैयार रखें।
- धैर्य: आपदा के समय घबराएं नहीं और सुरक्षित स्थान पर रहें।
- पर्यावरण संरक्षण: बाढ़ और सूखे से बचने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें।
5. परीक्षा के लिए कुछ अतिरिक्त महत्वपूर्ण बिंदु
- ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse Effect): वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) जैसी गैसों की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी के औसत तापमान का बढ़ना ‘ग्लोबल वार्मिंग’ कहलाता है।
- ओजोन परत (Ozone Layer): यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV Rays) से हमारी रक्षा करती है। क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण इस परत को नुकसान पहुँच रहा है।
- 3R का सिद्धांत: प्रदूषण कम करने के लिए Reduce (उपयोग कम करना), Reuse (पुनः उपयोग करना) और Recycle (पुनर्चक्रण) का पालन करना चाहिए।
- सुनामी (Tsunami): जब समुद्र की गहराई में भूकंप आता है, तो समुद्र में बहुत ऊँची और विनाशकारी लहरें उठती हैं, जिन्हें सुनामी कहते हैं।
- पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem): सजीव (पौधे, जीव) और निर्जीव (हवा, जल, मिट्टी) घटकों के बीच के आपसी संबंध को पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।
पर्यावरण प्रदूषण : PYQ 2015-2025
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. जल प्रदूषण के मुख्य कारण लिखिए। 09/2020
उत्तर: औद्योगिक अपशिष्ट (Chemicals), घरेलू वाहित मल (Sewage), कृषि रसायन (उर्वरक/कीटनाशक), मृत शवों का विसर्जन आदि जल प्रदूषण के मुख्य कारण है।
प्रश्न 2. किन्हीं पांच प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखिए। 11/2025
उत्तर: (1) भूकम्प (2) बाढ़ (3) सूखा (4) चक्रवात/तूफान (5) ज्वालामुखी विस्फोट (या सुनामी)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 3. आँधी के क्या लक्षण हैं? लिखिए। 12/2015
उत्तर: आँधी के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
- आकाश का रंग बदलना: आँधी से पहले आसमान पीला, भूरा या लालिमा लिए दिखने लगता है, खासकर धूल भरी आँधी में।
- तेज़ हवा चलना: हवा की गति अचानक बहुत बढ़ जाती है, जिससे पेड़, पत्ते और हल्की वस्तुएँ उड़ने लगती हैं।
- तापमान में गिरावट: ठंडी हवा के तेज़ झोंके आने लगते हैं, जिससे तापमान अचानक कम हो जाता है।
- वायुदाब घट जाना: आँधी आने से पहले हवा का दाब तेजी से कम होता है, जिसे मौसम यंत्रों से मापा जा सकता है।
- धूल और रेत उठना: धूल भरी आँधी में हवा के साथ बहुत ज्यादा मिट्टी और रेत उड़कर आसमान में भर जाती है।
- अंधेरा छा जाना: धूल या घने बादलों के कारण दूर की चीजें दिखाई देना बंद हो जाता है और अचानक अंधेरा हो जाता है।
- बिजली और गरज: कई बार आँधी के साथ तेज़ गरज, बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट होती है।
- बारिश या ओले गिरना: गरज-चमक वाली आँधी में अचानक तेज़ बारिश या ओलावृष्टि भी शुरू हो सकती है।
प्रश्न 4. भूकम्प आने के क्या-क्या कारण हैं? भूकंप से बचने के उपाय एवं प्रबंधन के क्या-क्या तरीके आप अपने स्तर से अपनाएंगे लिखिए। 18/2015
उत्तर: भूकम्प आने के कारण:
- टेक्टोनिक प्लेटों का खिसकना – पृथ्वी की प्लेटें आपस में टकराती या खिसकती हैं, जिससे झटके पैदा होते हैं।
- ज्वालामुखी विस्फोट – ज्वालामुखी क्षेत्रों में विस्फोट के कारण भूकम्प आ सकता है।
- मानवीय गतिविधियाँ – बाँध निर्माण, खनन और भारी विस्फोट भी भूकंप का कारण बन सकते हैं।
बचने के उपाय एवं प्रबंधन:
- भूकम्परोधी मकान बनाना।
- झटके आने पर खुले मैदान में जाना।
- इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहना।
- यदि घर के अंदर हों तो तुरंत मजबूत मेज या बिस्तर के नीचे शरण लेना ।
- बिजली, गैस आदि की सप्लाई बंद कर दें (यदि सुरक्षित हो)।
- घर में प्राथमिक उपचार (First Aid Kit), टॉर्च, पानी और सूखा भोजन तैयार रखना।
- स्कूल और घर में दूसरों को भूकंप सुरक्षा के बारे में जागरूक करना।
प्रश्न 5. प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए क्या-क्या उपाय करना चाहिए? 17/2019
उत्तर: प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा के लिए सतर्कता, समय पर चेतावनी और तैयारी सबसे महत्वपूर्ण हैं। प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए निम्न उपाय करना चाहिए-
- पूर्व चेतावनी प्रणालियों (रेडियो/TV) पर ध्यान देना चाहिए।
- आपातकालीन किट, प्राथमिक उपचार सामग्री और महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए।
- मजबूत इमारतों का निर्माण करना चाहिए।
- बाढ़ और सूखा जैसी आपदाओं को रोकने हेतु वृक्षारोपण करना चाहिए।
- आपदा के समय धैर्य रखना चाहिए और सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए।
प्रश्न 6. ज्वालामुखी क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं? 13/2022
उत्तर: ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर वह छिद्र या द्वार है, जिससे पिघला हुआ लावा, गैसें, राख और भाप बाहर निकलती हैं।
ज्वालामुखी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
- सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcanoes): जिनमें हाल ही में विस्फोट हुआ हो।
- प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dormant Volcanoes): जो लंबे समय से शांत हों पर भविष्य में सक्रिय हो सकते हैं।
- शांत ज्वालामुखी (Extinct Volcanoes): जिनमें विस्फोट की कोई संभावना नहीं है।
प्रश्न 7. अम्ल वर्षा किन दो ऑक्साइडों के वातावरणीय जल के साथ क्रिया करके बनती है? 15/2022
उत्तर: अम्ल वर्षा वातावरण में उत्सर्जित सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) के वर्षा जल के साथ अभिक्रिया करने से बनती है। ये गैसें जल में घुलकर क्रमशः सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं, जिससे वर्षा का जल अत्यधिक अम्लीय हो जाता है। यह पर्यावरण, मृदा, जल और इमारतों को हानि पहुँचाती है।
प्रश्न 8. ध्वनि प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को समझाइए। 17/2023
उत्तर: ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक और अवांछित शोर से होने वाला प्रदूषण है जो मानव एवं पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। तेज आवाजें जैसे—लाउडस्पीकर, वाहन हॉर्न, मशीनें, पटाखे—लंबे समय तक सुनने पर कई समस्याएँ पैदा करती हैं। इसके प्रभावों में सुनने की क्षमता में कमी, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन बढ़ना, तनाव, अनिद्रा और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। लगातार तेज आवाजें मानसिक शांति भंग करती हैं और बच्चों की पढ़ाई व एकाग्रता पर बुरा असर डालती हैं। अस्पताल, स्कूल और घर जैसे शांत क्षेत्रों में यह विशेष रूप से हानिकारक सिद्ध होता है।
प्रश्न 9. मृदा प्रदूषण क्या है? इनके कारण एवं स्रोत, प्रभाव तथा रोकने के उपायों का वर्णन कीजिए। 17/2025
उत्तर: परिभाषा: मृदा में हानिकारक रसायन, प्लास्टिक, कीटनाशक या अपशिष्ट मिल जाने से उसकी गुणवत्ता और उर्वरता घट जाना ही मृदा प्रदूषण है।
कारण एवं स्रोत: अत्यधिक रासायनिक खाद, कीटनाशक, औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और अपशिष्ट जल।
प्रभाव: फसल उत्पादन में कमी, मिट्टी की संरचना नष्ट होना, भूजल प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव।
रोकथाम: जैविक खेती, अपशिष्ट का उचित निपटान, रासायनिक उपयोग में कमी, वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण तकनीकें।
2nd Semester Science Notes
किसी भी Chapter का नोट्स पढ़ने के लिए यहाँ Click करें-
- पृथ्वी और आकाश
- मृदा तथा फसलें
- कार्य एवं ऊर्जा
- सरल मशीनें
- जीवों की संरचना
- जीवन की क्रियाएं
- मानव शरीर के अंग एवं कार्य
- भोजन, स्वास्थ्य एवं रोग
- तत्वों का वर्गीकरण
- पास-पड़ोस में होने वाले परिवर्तन
- अम्ल, क्षारक तथा लवण
- पर्यावरण प्रदूषण




