DElEd 2nd Semester Science : Ch-6 जीवन की क्रियाएं
यदि आप DElEd 2nd Semester Science की तैयारी कर रहे हैं, तो Chapter-6 “जीवन की क्रियाएं” आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस पोस्ट में जीवन की मूलभूत क्रियाओं जैसे पोषण (Nutrition), श्वसन (Respiration), परिवहन (Transportation) और उत्सर्जन (Excretion) को सरल और आसान भाषा में समझाया गया है। साथ ही, इस अध्याय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न, पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले टॉपिक्स भी शामिल किए गए हैं। यह सामग्री विशेष रूप से UP DElEd परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए उपयोगी है। यहां दी गई जानकारी आपकी अवधारणाओं को मजबूत करेगी और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करेगी। DElEd Science Chapter-6 की पूरी तैयारी के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।
1. पोषण एवं प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
पोषण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव भोजन प्राप्त करते हैं और उससे ऊर्जा, वृद्धि, मरम्मत तथा जीवन क्रियाएँ करते हैं।
पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसलिए उन्हें स्वपोषी कहा जाता है।
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
परिभाषा: वह प्रक्रिया जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जल (H2O) का उपयोग करके भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं और ऑक्सीजन (O2) मुक्त करते हैं।
रासायनिक समीकरण (Chemical Equation):
6CO2 + 12H2O → C6H12O6 + 6H2O + 6O2
मुख्य बिंदु:
प्रकाश संश्लेषण में ऑक्सीजन गैस निकलती है।
यह क्रिया केवल हरे पौधों में (क्लोरोप्लास्ट में) होती है।
2. पौधों की संरचना (Plant Structure)
पौधे का शरीर सामान्यतः दो मुख्य भागों में विभाजित होता है— जड़ तंत्र (Root System) तथा प्ररोह तंत्र (Shoot System)।
(A) जड़ तंत्र (Root System)
जड़ पौधे का भूमिगत भाग होता है जो सामान्यतः मिट्टी के भीतर फैला रहता है। यह पौधे का पहला विकसित होने वाला अंग है।
जड़ के मुख्य कार्य:
- पौधे को भूमि में दृढ़ता से स्थिर रखना।
- मिट्टी से जल तथा खनिज लवणों का अवशोषण करना।
- कुछ पौधों में भोजन का संग्रह करना (जैसे—गाजर, मूली)।
- कुछ जड़ों में श्वसन एवं सहारा प्रदान करने का कार्य भी होता है।
जड़ों के प्रकार:
- मूसला जड़ (Tap Root):
- बीज के भ्रूण मूलांकुर से विकसित होती है।
- एक मुख्य जड़ तथा उससे निकली पार्श्व जड़ें होती हैं।
- उदाहरण—चना, सरसों, बैंगन, मटर।
- रेशेदार जड़/झकड़ा जड़ (Fibrous Root):
- तने के आधार से अनेक समान आकार की जड़ें निकलती हैं।
- इनमें कोई मुख्य जड़ नहीं होती।
- उदाहरण— प्याज, गेहूँ, धान, मक्का।
(B) प्ररोह तंत्र (Shoot System)
प्ररोह तंत्र पौधे का वह भाग है जो भूमि के ऊपर स्थित होता है। इसमें तना, शाखाएँ, पत्तियाँ, पुष्प, फल और बीज सम्मिलित होते हैं।
- तना (Stem)
तना पौधे का मुख्य अक्ष होता है। यह जड़ और पत्तियों के बीच सेतु का कार्य करता है।
तने के कार्य:
- पौधे को सहारा देना।
- जल एवं खनिजों का जड़ों से पत्तियों तक परिवहन।
- पत्तियों द्वारा बने भोजन का अन्य भागों तक वितरण।
- कुछ पौधों में भोजन का संग्रह (आलू, अदरक)।
- पत्ती (Leaf)
पत्ती पौधे का हरा और चपटा भाग होती है। इसे भोजन निर्माण का प्रमुख अंग माना जाता है।
पत्ती के कार्य:
- प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाना।
- वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल संतुलन बनाए रखना।
- श्वसन क्रिया में सहायता।
- पुष्प (Flower)
पुष्प पौधों का जनन अंग होता है। यह लैंगिक जनन में भाग लेता है।
पुष्प के मुख्य भाग:
- बाह्यदल (Sepals)
- दल/पंखुड़ी (Petals)
- पुंकेसर (Stamen) – नर जनन अंग (तन्तु, परागकोष)
- स्त्रीकेसर (Carpel) – मादा जनन अंग (अंडाशय, वर्तिका, वर्तिकाग्र)
3. पौधों में जनन (Reproduction in Plants)
जनन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पौधे अपनी संख्या बढ़ाते हैं और अपनी जाति को बनाए रखते हैं। पौधों में जनन मुख्यतः दो प्रकार का होता है— अलैंगिक जनन और लैंगिक जनन।
(A) अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction)
इस प्रकार के जनन में केवल एक ही जनक पौधा भाग लेता है। इसमें युग्मकों का निर्माण नहीं होता।
- वर्धी प्रजनन (Vegetative Propagation)
वर्धी प्रजनन (Vegetative Propagation): वर्धी प्रजनन अलैंगिक प्रजनन का वह प्रकार है जिसमें पौधों में बीज के बिना नए पौधे बनते हैं। इसमें पौधे के वर्धी भागों जैसे—जड़, तना, पत्ती आदि से नया पौधा विकसित होता है।
उदाहरण:
- तना द्वारा—आलू, प्याज, अदरक, गन्ना
- जड़ द्वारा—शकरकंद, डहेलिया
- पत्ती द्वारा—ब्रायोफिलम
- बीजाणु द्वारा जनन (Spore Formation)
यह जनन फर्न, शैवाल एवं कवक में पाया जाता है। बीजाणु अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नया पौधा बनाते हैं।
(B) लैंगिक जनन (Sexual Reproduction)
इस जनन में नर और मादा युग्मकों का संयोग होता है। यह प्रक्रिया पुष्पों में संपन्न होती है।
लैंगिक जनन की मुख्य अवस्थाएँ:
1. परागण (Pollination)- परागकोश (Anther) से परागकणों (Pollen grains) का वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुँचने की प्रक्रिया को परागण कहते हैं। परागण के माध्यम: वायु, कीट, जल, पक्षी।
परागण के प्रकार: (a) स्व-परागण (b) पर-परागण
- निषेचन (Fertilization)- नर और मादा युग्मकों के संलयन की प्रक्रिया को निषेचन कहते हैं।
- बीज और फल का निर्माण- निषेचन के बाद बीज बनता है, जो अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर नया पौधा बनाता है।
4. कीटभक्षी पौधे (Insectivorous Plants)
ये पौधे नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए कीटों का भक्षण करते हैं।
- उदाहरण: घटपर्णी (Pitcher plant/Nepenthes), ड्रोसेरा (Sundew), वीनस फ्लाईट्रैप।
5. वाष्पन एवं वाष्पोत्सर्जन (Evaporation & Transpiration)
- वाष्पन (Evaporation): किसी द्रव का उसके क्वथनांक (Boiling point) से कम तापमान पर वाष्प (गैस) में बदलने की प्रक्रिया।
- वाष्पोत्सर्जन: पौधों के वायवीय भागों (जैसे पत्तियों के रंध्र) से जल का वाष्प के रूप में बाहर निकलना।
6. श्वसन क्रिया (Respiration)
श्वसन एक ऊर्जा मुक्त करने वाली प्रक्रिया है जो सभी जीवित कोशिकाओं में होती है।
मानव के श्वसन अंग (Human Respiratory Organs)
- नासिका (Nose)
नासिका वायु को शरीर के भीतर प्रवेश कराने के साथ-साथ उसे छानकर शुद्ध करती है। - नासिका गुहा (Nasal Cavity)
नासिका गुहा वायु को गर्म, नम तथा धूल-कणों से मुक्त करती है। - ग्रसनी (Pharynx)
ग्रसनी नासिका गुहा को कंठ से जोड़ने वाली एक सामान्य वायु नली है। - कंठ / स्वरयंत्र (Larynx)
कंठ वायु के प्रवाह के साथ-साथ ध्वनि उत्पन्न करने का कार्य करता है। - श्वासनली (Trachea)
श्वासनली वायु को कंठ से फेफड़ों तक पहुँचाने का कार्य करती है। - श्वसनी (Bronchi)
श्वसनी श्वासनली की दो शाखाएँ होती हैं जो वायु को दोनों फेफड़ों तक ले जाती हैं। - श्वसिकाएँ (Bronchioles)
श्वसिकाएँ श्वसनी की सूक्ष्म शाखाएँ होती हैं जो वायु को वायुकोषों तक पहुँचाती हैं। - वायुकोष (Alveoli)
वायुकोषों में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का वास्तविक आदान-प्रदान होता है। - फेफड़े (Lungs)
फेफड़े स्पंजी श्वसन अंग हैं जिनमें श्वसन की मुख्य क्रिया सम्पन्न होती है। - डायफ्राम (Diaphragm)
डायफ्राम एक पेशीय झिल्ली है जो श्वास-प्रश्वास की क्रिया में सहायक होती है।
प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में मुख्य अंतर:
विशेषता
प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)
श्वसन (Respiration)
किसमें होता है?
केवल हरे पौधों में।
सभी जीवित जीवों (पेड़-पौधे व जंतु) में।
समय
केवल दिन में (प्रकाश की उपस्थिति में)।
दिन और रात (हर समय)।
गैसें
CO2 लेते हैं, O2 छोड़ते हैं।
O2 लेते हैं, CO2 छोड़ते हैं।
ऊर्जा
ऊर्जा संचित (Store) होती है।
ऊर्जा मुक्त (Release) होती है।
स्थान
क्लोरोप्लास्ट में।
माइटोकॉन्ड्रिया में।
- नासिका (Nose)
7. उत्सर्जन तंत्र (Excretion System)
शरीर में मेटाबॉलिक क्रियाओं के दौरान बनने वाले हानिकारक अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, अमोनिया) को बाहर निकालने की क्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।
(A) कशेरुकी प्राणियों (Vertebrates) के उत्सर्जी अंग:
- वृक्क (Kidney): मुख्य उत्सर्जी अंग (यूरिया छानना)।
- त्वचा (Skin): पसीने के माध्यम से लवण बाहर निकालना।
- फेफड़े (Lungs): CO2 का उत्सर्जन।
- यकृत (Liver): हानिकारक पदार्थों का रूपांतरण।
(B) कीटों का उत्सर्जन:
- कीटों में उत्सर्जन मैल्पीघियन नलिकाओं (Malpighian tubules) द्वारा होता है।
(C) मानव उत्सर्जन तंत्र के भाग:
- वृक्क (Kidneys): दो सेम के बीज के आकार के अंग।
- मूत्रवाहिनी (Ureters): नलियां जो मूत्र को मूत्राशय तक ले जाती हैं।
- मूत्राशय (Urinary Bladder): मूत्र को जमा करने वाली थैली।
- मूत्रमार्ग (Urethra): जिससे मूत्र शरीर से बाहर निकलता है।
Ch-6 जीवन की क्रियाएं : PYQ 2015-2025
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. जड़ों द्वारा वर्धी प्रजनन होता है- 04/2017
(A) आलू में
(B) शकरकन्द में
(C) अदरक में
(D) गन्ना में
उत्तर: (B) शकरकन्द में
प्रश्न 2. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कौन-सी गैस निकलती है? 03/2019
(A) CO2
(B) O2
(C) NH3
(D) N2
उत्तर: (B) O2 (ऑक्सीजन)
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 3. प्रकाश संश्लेषण क्रिया को दर्शाने हेतु केवल रासायनिक समीकरण लिखिए। 08/2015
उत्तर: 6CO2 + 12H2O → C6H12O6 + 6H2O + 6O2
प्रश्न 4. वाष्पन किसे कहते हैं? 08/2016
उत्तर: किसी द्रव का उसके क्वथनांक से कम तापमान पर वाष्प (गैस) में बदलने की प्रक्रिया वाष्पन (Evaporation) कहलाती है।
प्रश्न 5. किन्ही दो कीटभक्षी पौधों का नाम लिखिए। 08/2017
उत्तर: घटपर्णी (Nepenthes/Pitcher plant), ड्रोसेरा (Sundew)।
प्रश्न 6. प्रकाश संश्लेषण से आप क्या समझते हैं? 07/2025
उत्तर: प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और जल (H2O) से अपना भोजन (ग्लूकोज) बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
6CO2 + 12H2O → C6H12O6 + 6H2O + 6O2
प्रश्न 7. कीटों में वर्ज्य पदार्थों का निष्कासन किस उत्सर्जी अंग द्वारा होता है? 01/2015
उत्तर: मैल्पीघियन नलिकाओं (Malpighian tubules) द्वारा।
प्रश्न 8. कशेरुकी प्राणियों के उत्सर्जी अंगों के नाम लिखिए। 10/2019, 010/2025
उत्तर: कशेरुकी प्राणियों के उत्सर्जी अंग हैं- वृक्क (किडनी), त्वचा, फेफड़े, यकृत (लिवर)।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 9. जड़ों के मुख्य कार्य क्या है? मक्का, प्याज, सरसों तथा बैंगन में पायी जाने वाली जड़ों के नाम बताइए। 17/2016
उत्तर: जड़ों के कार्य: पौधे को मिट्टी में स्थिर रखना, मिट्टी से जल और खनिज लवणों का अवशोषण करना।
जड़ों के प्रकार:
- मक्का: अपस्थानिक/झकड़ा जड़ें (Adventitious/Fibrous roots)
- प्याज: अपस्थानिक/झकड़ा जड़ें (Adventitious/Fibrous roots)
- सरसों: मूसला जड़ (Tap root)
- बैंगन: मूसला जड़ (Tap root)
प्रश्न 10. मानव के श्वसन अंग का नामांकित चित्र बनाइए। 15/2017, 14/2020
उत्तर: मानव के श्वसन अंग का नामांकित चित्र-

प्रश्न 11. प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अन्तर लिखिए। 12/2018
उत्तर: प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अन्तर-
प्रकाश संश्लेषण | श्वसन |
1. यह केवल हरे पौधों में होता है | 1. यह सभी जीवों में होता है |
2. इसमें सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है | 2. इसमें प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती |
3. इसमें CO₂ और जल से भोजन बनता है | 3. इसमें भोजन का अपघटन होता है |
4. इसमें ऊर्जा संचित होती है | 4. इसमें ऊर्जा मुक्त होती है |
5. यह क्लोरोप्लास्ट में होता है | 5. यह माइटोकॉन्ड्रिया में होता है |
6. इसमें ऑक्सीजन गैस निकलती है | 6. इसमें कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है |
7. यह संश्लेषणात्मक (Anabolic) प्रक्रिया है | 7. यह अपचयी (Catabolic) प्रक्रिया है |
प्रश्न 12. उत्सर्जन किसे कहते हैं? मानव के उत्सर्जन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।17/2018
उत्तर: शरीर में उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप बने हानिकारक और अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल) को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया उत्सर्जन कहलाती है।
मानव उत्सर्जन तंत्र में निम्नलिखित अंग शामिल होते हैं:
- वृक्क (Kidneys): संख्या में दो, ये मुख्य उत्सर्जन अंग हैं।
- मूत्रवाहिनी (Ureters): संख्या में दो, ये वृक्क से मूत्राशय तक मूत्र ले जाती हैं।
- मूत्राशय (Urinary Bladder): एक थैलीनुमा संरचना जो मूत्र को अस्थाईरूप से जमा करती है।





