UP D.El.Ed 3rd Semester Syllabus Pdf Download

UP D.El.Ed 3rd Semester Syllabus : अगर आप D.El.Ed कोर्स कर रहे हैं, तो तीसरा सेमेस्टर आपकी पूरी learning journey में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होता है। इसी चरण में आपको यह समझ आने लगता है कि बच्चे किस प्रकार सीखते हैं, उन्हें प्रभावी तरीके से कैसे पढ़ाया जाए, और एक सफल शिक्षक बनने के लिए किन-किन कौशलों की आवश्यकता होती है। इसलिए D.El.Ed 3rd Semester Syllabus को अच्छी तरह समझना बेहद आवश्यक हो जाता है।

D.El.Ed (Diploma in Elementary Education) के तृतीय सेमेस्टर को शिक्षक प्रशिक्षण का मजबूत आधार माना जाता है। इस दौरान प्रशिक्षुओं को बाल विकास, अधिगम की प्रक्रिया और आधुनिक शिक्षण विधियों की गहराई से जानकारी दी जाती है। साथ ही, यह सेमेस्टर आपको practical understanding भी देता है, जिससे आप एक बेहतर और कुशल शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं। इस लेख में हम D.El.Ed 3rd Semester Syllabus को विस्तार से जानेंगे, ताकि आपकी तैयारी और भी बेहतर और मजबूत हो सके।

📚 D.El.Ed 3rd Semester Subjects List

  • शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार
  • समावेशी शिक्षा
  • विज्ञान            
  • गणित
  • सामाजिक अध्ययन
  • हिन्दी           
  • संस्कृत
  • कम्प्यूटर

📚 D.El.Ed 3rd Semester Marksheet

UP D.El.Ed 3rd Semester Syllabus

D.El.Ed 3rd Semester Syllabus Pdf

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1. शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचारया

1. मापन एवं मूल्यांकन

शैक्षिक मापन एवं मूल्यांकन की अवधारणा।
शैक्षिक मापन का अर्थ
मूल्यांकन के उद्देश्य
मूल्यांकन की संकल्पना
मूल्यांकन के क्षेत्र

मूल्यांकन की आवश्यकता एवं महत्व
मूल्यांकन की प्रशासनिक आवश्यकता
मूल्यांकन की शैक्षिक आवश्यकता
मूल्यांकन की शैक्षिक अनुसंधान में आवश्यकता
सामाजिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन की आवश्यकता

मापन एवं मूल्यांकन में अन्तर।
परीक्षण एवं मापन में अन्तर

सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की अवधारणा एवं महत्व।
दक्षता आधारित मूल्यांकन
व्यापक मूल्यांकन
सतत मूल्यांकन एवं महत्व
सतत मूल्यांकन की कार्यप्रणाली एवं सोपान

मूल्यांकन के पक्ष

संज्ञानात्मक (Cognitive)ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग या व्यवहारिकता, विश्लेषण, संश्लेषण एवं मूल्यांकन।

भावात्मक (Affective)ग्रहण करना, ध्यान देना, अनुक्रिया करना, मूल्य आँकना, संगठन, मूल्य द्वारा विशिष्टीकरण।

कौशलात्मक (Conative) एवं व्यवहारात्मक (Behaviour
overall activity)
सामाजिक कौशल, यांत्रिक कौशल, गणितीय कौशल, भाषायी कौशल।

उद्दीपन, क्रियान्वयन, नियन्त्रण, समायोजन, स्वाभावीकरण

मूल्यांकन के प्रकार

मौखिक परीक्षा लिखित परीक्षा
साक्षात्कार/निरीक्षण/अवलोकन/प्रायोगिक
रचनात्मक मूल्यांकन (Formulative Evaluation)
आकलित मूल्यांकन (Summative Evaluation)

उत्तम परीक्षण/मूल्यांकन की विशेषताएँ, शिक्षण अधिगम और मूल्यांकन का सम्बन्ध।

प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया

योजना निर्माण, ब्लूप्रिंट, सम्पादन तथा अंक निर्धारण।
प्रश्नों के प्रकार (वस्तुनिष्ठ, अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय)
शैक्षिक उद्देश्यों के अनुसार प्रश्नों के पक्ष (ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग, कौशल)

शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार | 3

मूल्यांकन अभिलेखीकरण (संज्ञानात्मक तथा सहगामी पक्ष) सतत, मासिक, अर्द्धवार्षिक एवं वार्षिक मूल्यांकन, प्रगति पत्र।

निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण।

क्रियात्मक शोध

शोध का अर्थ, प्रकार, उद्देश्य, आवश्यकता एवं महत्व।
क्रियात्मक शोध के क्षेत्र।
क्रियात्मक शोध के चरण एवं प्रारूप निर्माण।
क्रियात्मक शोध उपकरण निर्माण।
क्रियात्मक शोध का सम्पादन/अभिलेखीकरण।

शैक्षिक नवाचार

शिक्षा में नवाचार का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व।

शैक्षिक नवाचार के क्षेत्र
(शिक्षण अधिगम के सुधार हेतु स्थानीय समुदाय/परिवेश के संसाधनों की पहचान और उनका उपयोग का मूल्यांकन, प्रार्थना स्थल की गतिविधि, पाठ्य सहगामी क्रियाकलाप, सामुदायिक सहभागिता, विद्यालय प्रबन्धन, विद्यालय कक्षाशिक्षण समस्यात्मक दृष्टान्त, बाल प्रेरणा।)

2. समावेशी शिक्षा

खण्ड () विशिष्ट आवश्यकता वाले बालक

(1) शैक्षिक समावेशन से अभिप्राय, पहचान एवं निराकरण तथा अवसरवंचित वर्ग, भाषा, धर्म, जाति, क्षेत्र, वर्ग, लिंग, शारीरिक क्षमता (दृष्टिबाधित, श्रवणबाधित एवं वाक्/अभिव्यक्ति), मानसिक दक्षता।

(2) समावेशन के लिए आवश्यक उपकरण, सामग्री, विधियाँ, टी. एल. एम. एवं अभिवृत्तियाँ (Attitude)

(3) समावेशित बालकों का अधिगम जाँचने हेतु आवश्यक टूल्स एवं तकनीकी।

(4) समावेशित बालकों के लिए विशेष शिक्षण विधियाँ, यथा ब्रेल लिपि आदि।

खण्ड () निर्देशन एवं परामर्श

(1) समावेशी बालकों हेतु निर्देशन एवं परामर्श अर्थ, क्षेत्र, प्रकार, विधियाँ, आवश्यकता एवं क्षेत्र (Scope), चरण।

(2) परामर्श में सहयोग देने वाले विभाग/संस्थाएँ
(i) मनोविज्ञान केन्द्र, . प्र., इलाहाबाद
(ii) मंडलीय मनोविज्ञान केन्द्र (मण्डल स्तर पर)
(iii) जिला चिकित्सालय
(iv) जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण डायट सेन्टर
(v) पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण तंत्र
(vi) समुदाय एवं विद्यालय की सहयोगी समितियाँ
(vii) सरकारी एवं गैरसरकारी संगठन

(3) बाल अधिगम में निर्देशन एवं परामर्श का महत्व।

3. विज्ञान

(1) दैनिक जीवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (परिवहन, चिकित्सा, जनसंचार, मनोरंजन, उद्योग, कृषि, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, आधुनिक ईंधन एवं दूरस्थ शिक्षा) मानव समाज को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से लाभ एवं हानियाँ।

(2) दाब तथा वैज्ञानिक घटना।

(3) जीवजन्तुओं के बाह्य एवं आन्तरिक अंगों के कार्यों में विविधता।

(4) सूक्ष्मजीवों की दुनिया संरचना तथा उपयोगिता, सूक्ष्मजीव दोस्त एवं दुश्मन, भोजन पदार्थों का परिरक्षण।

(5) प्राकृतिक सम्पदा का संरक्षण एवं प्रबन्ध, जीवों का वर्गीकरण।

(6) कार्बन एवं उसके यौगिक।

(7) अपस्मार रोग/अतिनिद्रा रोग जैसी बीमारियों का उत्पन्न होना, पहचान, कारण एवं उपचार।

(8) पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन, जलीय पौधों एवं जानवरों का प्राकृतिक वास, मरुस्थलीय पौधों एवं जानवरों का प्राकृतिक वास, मानव का हस्तक्षेप, वन्य जीवजन्तुओं का संरक्षण कार्यक्रम, ग्रीन हाउस प्रभाव, ओजोन क्षरण, धरती का बढ़ता तापमान।

 

(9) ऊष्मा, प्रकाश एवं ध्वनि
ऊष्मा का मापन, संचरण एवं संवहन।
प्रकाश स्रोत एवं संचरण, प्रकाश का परावर्तन एवं अपवर्तन, गोलाकार, अवतल एवं उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना।
ध्वनि संचरण, आवृत्ति एवं आयाम।

4. गणित

1) अनुपात, समानुपात, अनुलेप एवं प्रतिलोम समानुपात का अर्थ।

(2) समानुपाती राशियों में बाह्य पदों एवं मध्य पदों के गुणनफल में सम्बन्ध।

(3) भिन्नों की अवधारणा।

(4) पूर्ण तथा परिमेय संख्याओं को धनात्मक अथवा ऋणात्मक रूप में लिखना।

(5) सरल एवं चक्रवृद्धि ब्याज की अवधारणा। सरल ब्याज, सूद तथा चक्रवृद्धि मिश्रधन का सूत्र एवं अनुप्रयोग।

(6) बैंक की जानकारी, बैंक में खाता खोलना तथा जमा करना।

(7) लाभहानि, प्रतिशत से सम्बन्धित प्रश्नों का हल करना।

(8) शेयर, लाभांश।

(9) समुच्चय की संकल्पना, लेखन की विधियां, समुच्चय के प्रकार (सीमित, असीमित, एकल एवं रिक्त), समुच्चय का संघ, अन्तर तथा सर्वसमुच्चय का बनाना।

(10) दो राशियों का गुणनखंड, दो वर्गों के अन्तर के सूत्र एवं बीजगणितीय व्यंजकों का गुणनखंड तथा द्विपदीय व्यंजकों का गुणनखंड।

(11) बहुपदीय व्यंजकों में एक पदीय एवं द्विपदीय व्यंजकों से भाग।

(12) अवकलजों के आधार।

(13) आयतन एवं घनफल की संकल्पना।

(14) घन, घनाभ की अवधारणा तथा उनका आयतन एवं सम्पूर्ण पृष्ठ।

(15) वृत्तखण्ड की अवधारणा।

(16) वृत्तखण्ड का कोण।

(17) चाप द्वारा वृत्त के केन्द्र तथा परिधि पर बनने वाले कोणों में सम्बन्ध एवं उनका परिमाप।

(18) वृत्त की छेदक रेखा तथा स्पर्श बिन्दु की अवधारणा।

(19) वृत्त पर स्थित बिन्दु से स्पर्श रेखा खींचना।

5. सामाजिक अध्ययन

(1) भारत में मुगल साम्राज्य बाबर, हुमायूँ एवं उसकी विदेश को पुनः वापसी शेरशाह का उदय, अकबर, जहाँगीर, औरंगजेब

एवं मुगल साम्राज्य का पतन।

(2) मुगलों का प्रशासनिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, कलात्मक एवं आर्थिक क्षेत्र में योगदान।

(3) मराठा शक्ति का अभ्युदय शिवाजी, अष्टप्रधान व्यवस्था में भारत की स्थिति।

(4) भारत में यूरोपीय शक्तियों का प्रवेश एवं ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना, पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, फ्रांसीसी।

(5) भारत की सत्ता के लिए यूरोपीय शक्तियों में संघर्ष प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय कर्नाटक युद्ध, द्वैध नीति, प्लासी का युद्ध,

बक्सर का युद्ध तथा इलाहाबाद की संधि।

(6) भारत में अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना रॉबर्ट क्लाइव, वारेन हेस्टिंग्स, लॉर्ड कॉर्नवालिस, लॉर्ड वेलेजली, लॉर्ड विलियम बैंटिक, लॉर्ड डलहौजी।

(7) जीवमण्डल प्राकृतिक प्रदेश एवं जनजीवन (शीत कटिबंधीय प्रदेश, उष्ण कटिबंधीय प्रदेश, शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेश, जलवायु, वनस्पति, जीवजंतु एवं मानव जीवन), उद्योगधंधे।

(8) महाद्वीपों का विभाजन एशिया, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया तथा अंटार्कटिका सामान्य परिचय, जनसंख्या का वितरण एवं घनत्व।

(9) विश्व में प्राकृतिक संसाधन, यातायात तथा संचार के साधन, खनिज संपदा।

(10) मुद्रा की आवश्यकता तथा उसकी पूर्ति हेतु प्रचलन की विधि, बैंकिंग व्यवस्था का उपयोग एवं संरक्षण।

(11) हमारा भारत प्राकृतिक एवं राजनैतिक इकाइयाँ, हमारी प्राकृतिक संपदा और उनका उपयोग।

(12) हमारी खनिज संपदा, शक्ति के साधन, कृषि और सिंचाई, आयातनिर्यात।

(13) सरकार के अंग शक्ति का पृथक्करण, शक्तियों का बंटवारा केन्द्र सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची के प्रमुख विषय।

(14) संसद (i) लोकसभा सदस्यों की योग्यताएँ, कार्यकाल, पदाधिकारी, अधिवेशन एवं कार्य।
(ii)
राज्यसभा सदस्यों की योग्यताएँ, कार्यकाल, पदाधिकारी, अधिवेशन एवं कार्य।
(iii)
राष्ट्रपति चुनाव, कार्यकाल, महाभियोग, शक्तियाँ एवं मंत्रिपरिषद।
(iv)
कानून बनाने की प्रक्रिया साधारण बहुमत, विशेष बहुमत।

(15) कार्यपालिका प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद चुनाव कार्य, संसद का मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण।

(16) न्यायपालिका न्यायालय के प्रकार (i) जनपद स्तरीय न्यायालय, (ii) उच्च न्यायालय, (iii) उच्चतम न्यायालय।

(17) न्यायाधीशों की योग्यताएँ, कार्यकाल (i) उच्चतम न्यायालय के अधिकार, (ii) लोक अदालत, (iii) जनहित वाद।

(18) भारतीय वित्त व्यवस्था एवं बजट कर एवं उसके प्रकार, केन्द्र एवं राज्यों के मध्य करों का बंटवारा, केन्द्र सरकार की आयव्यय के स्रोत, राज्य सरकार की आयव्यय की मदें, सरकार द्वारा शिक्षा के दृष्टिकोण से बजट 2013-14 में रखे गये बिंदु।

(19) पंचवर्षीय योजनाएँ पिछली 11वीं पंचवर्षीय योजनाओं के मुख्य बिंदु, वर्तमान में 12वीं पंचवर्षीय योजना विशेषकर शिक्षा के दृष्टिकोण से।

(20) भारतीय आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था बैंक एवं उनके प्रकार, भारतीय रिजर्व बैंक, स्टेट बैंक, भूमि विकास बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, नाबार्ड, बैंकिंग, बैंकों का राष्ट्रीयकरण एवं निजीकरण, आधुनिक अर्थव्यवस्था में बैंकों का महत्व।

6. हिन्दी

(1) पाठ्यपुस्तक में आये प्रमुख कवियों और लेखकों का सामान्य परिचय।

(2) श्रुत सामग्री में प्रयुक्त शब्दों, मुहावरों, लोकोक्तियों का प्रसंगानुकूल प्रयोग।

(3) राष्ट्रीय पर्व, मेला, त्यौहार, जैसे विषयों पर अपने शब्दों में गद्य अथवा पद्य में स्वतंत्र लेखन।

(4) कर्ता, कर्म के अनुसार क्रिया में परिवर्तन, तत्सम, तद्भव, देशज रूपों का परिचय; सरल, संयुक्त एवं मिश्र वाक्य, वाक्यांश के लिए एक शब्द का प्रयोग।

(5) भावपुस्तक के अतिरिक्त अन्य पाठ्यवस्तु को पढ़कर समझना।

(6) औपचारिक एवं अनौपचारिक परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त भाषा का प्रयोग करना।

(7) अधिगम प्रतिफल का मूल्यांकन, शिक्षण प्रक्रिया एवं बालकों के क्रियाकलापों के साथ, मूल्यांकन को कक्षाओं में मौलिक और प्रभावात्मक बनाना तथा कक्षा 3 से आगे की कक्षाओं में अन्य तकनीकों के एक रूप में लिखित परीक्षा का संचालन।

7. संस्कृत

उद्देश्य

(1) प्रशिक्षुओं को बालकों के संस्कृत भाषा सीखने की प्रक्रिया से अवगत कराना एवं प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों को स्पष्ट करना।

(2) विषयवस्तु से सम्बन्धित टी.एल.एम. तैयार करने में प्रशिक्षित करना। संस्कृत की विषयवस्तु की समझ विकसित करना।

(3) संज्ञा, लिंग एवं वचन के माध्यम से बालकों में शुद्ध उच्चारण एवं लेखन कौशल का विकास करना।

(4) शब्द एवं धातु का ज्ञान कराते हुए उनके प्रयोग का कौशल विकसित करना।

(5) संस्कृत भाषा के महत्व से परिचित होकर बालकों में उच्चारण, वाचन, लेखन की दक्षता के विकास हेतु ऑडियो/वीडियो/आई.सी.टी. का प्रयोग करना सिखाना।

(6) प्रशिक्षु को भाषा का सतत एवं व्यापक मूल्यांकन करने में प्रशिक्षित करना।

(7) धातु रूप का ज्ञान कराते हुए उनके प्रयोग का कौशल विकसित करना।

(8) संस्कृत भाषा के महत्व से परिचित होकर बालकों में उच्चारण, वाचन, लेखन की दक्षता के विकास हेतु ऑडियो/वीडियो/आई.सी.टी. का प्रयोग करना।

(9) प्रशिक्षु को भाषा का सतत एवं व्यापक मूल्यांकन करने में प्रशिक्षित करना।

(10) संस्कृत ध्वनियों के उच्चारण स्थान से अवगत कराना एवं उनका शुद्ध उच्चारण हेतु प्रेरित करना।

(11) संस्कृत गद्य, श्लोकों एवं लघु कहानियों के माध्यम से छात्रों में राष्ट्रीय प्रेम, पर्यावरण संरक्षण तथा लैंगिक समानता जैसे मानवीय मूल्यों को विकसित करना।

(12) बालकों में सरल हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद करने का कौशल विकसित करना।

(13) संस्कृत भाषा के महत्व से अवगत होकर बालकों में संस्कृत के प्रति रुचि उत्पन्न करना।

(14) संस्कृत भाषा के संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण आदि के प्रयोग में दक्षता विकसित करना।

प्रशिक्षण प्रक्रिया/विधियाँ
प्रशिक्षुओं के मध्य विषयवस्तु को अधिकतर प्रयोग की जा सकने वाली शिक्षण विधियों के माध्यम से रखने का प्रयोग किया जाये। प्रशिक्षण शिक्षण गतिविधियों पर आधारित हो। प्रशिक्षण के समय सीखने एवं सिखाने की प्रक्रिया में प्रशिक्षुओं को सहभागी बनाया जाये। साथ ही उन्हें अपने शिक्षण में बालकों का सहयोग एवं उनकी सहभागिता सुनिश्चित करते हैं यह बताया जाये। यथासंभव सूचना तकनीक/कम्प्यूटर के माध्यम से विषयवस्तु को प्रस्तुत करने का भी प्रयास किया जाये।

प्रशिक्षण के समय प्रशिक्षु का निर्धारण प्रारूप पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन किया जाये जिससे वह इस प्रक्रिया से परिचित हो जाये तथा इसकी प्रयोग विधि सीख सकें।

कक्षा शिक्षण : विषयवस्तु

(1) संस्कृत वर्ण परिचय एवं उनके ध्वनि उच्चारण स्थान का ज्ञान।
(2) सन्धि प्रकरण प्रकार, सूत्र, नियम निर्देश सहित सन्धि विग्रह एवं सन्धि करने का ज्ञान।
(3) समास प्रकरण अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि एवं द्वन्द्व समास का ज्ञान।
(4) शब्द रूप शब्द प्रकार, वचन एवं विभक्तियों का ज्ञान।
(5) धातुरूप लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ् एवं लृट् लकार का पुरुष एवं वचन सहित ज्ञान।
(6) कारक, विभक्ति एवं चिह्न का ज्ञान।
(7) सुभाषित श्लोकों का सस्वर पाठ एवं अनुकरण वाचन।
(8) पाठ्यपुस्तक के अंशों का सुलेख, अनुलेख, श्रुतलेख एवं सरल अनुवाद।
(9) संवाद पाठों पर आधारित संस्कृत में छोटेछोटे वाक्यों की रचना करने का ज्ञान।
(10) हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद।
(11) उपसर्ग, प्रत्यय एवं वाक्य परिवर्तन का ज्ञान।
(12) एक से पचास तक संस्कृत संख्याओं का ज्ञान।

(13) सम्भाव्य शिक्षण विधाएँ शिक्षक प्रशिक्षण में क्रियाकलाप आधारित शिक्षणअधिगम का ज्ञान, मॉडल, गेम, वीडियो क्लिप, ऑडियो क्लिप प्रयोग करके, श्यामपट्ट कार्य के द्वारा, शब्द पट्टिका, चार्ट, कठिन शब्दों के चार्ट एवं उच्चारणाभ्यास के द्वारा अभिनय एवं प्रश्नोत्तर, प्रशिक्षकशिक्षक सहभागिता आदि के द्वारा प्रभावी शिक्षण सम्भव है।

8. कम्प्यूटर

Classroom Teaching : Content

1. I.C.T. (Information and Communication Technology)—
Introduction to ICT—
(i) Introduction and basic concepts,
(ii) Application and benefits of ICT in education,
(iii) Scope of ICT in education.

2. I.C.T. in Education and Studies—

(1) For Teacher— Use of ICT for knowledge enhancement—
(i) Accessing internet:
(a) Using websites (Wikipedia, open digital educational resources etc.),
(b) Using search engines,
(c) Communicating with experts,
(ii) Accessing CD-ROMs and DVDs:
(a) Using digital content,
(iii) Assessing digital content:
(a) Using ebooks,
(b) Using tutorials and training videos (YouTube etc.).

(2) Use of ICT for education delivery—
(i) SMART CLASSES and digital blackboard,
(ii) Creating and using slide presentations with projectors,
(iii) Educational A-Vs (Audio-videos) modules (Animated or non-animated or both),
(iv) Using online e-labs, libraries and emuseum in classes,
(v) Delivering distance education through digital/online services ODL mode:
(a) EDUSAT,
(b) Classes through teleconferencing and video conferencing,

(c) Prasar Bharti’s education services: Radio service (Gyanvani Radio station), Television service (Doordarshan’s Gyandarshan channel),

(d) Query handling through chat application and email,
(e) e-tuitions through online web-portals,
(f) MOOCs, DER etc.

(3) For Students—
(i) Use of ICT for knowledge enhancement,
(ii) Developing e-content through internet,
(iii) Digital project development,
(iv) Accessing education through Radio and TV services,
(v) Doubt clearing through online chats with experts,
(vi) Online tests through exam web portals (Meritnation, com etc.),
(vii) Tuitions,
(viii) Accessing various competitive exams information online,
(ix) Job search and enquiries through job portals (Naukri.com, Monster.com etc.).

3. I.C.T. in School Management—

(1) Using online services/tool:
(i) Official website for communication between school and students (and their guardians), school staff etc.
(ii) Online complaint portal for queries and problem eradication.

(2) Using school management software application/tools—
Digitization for school data for transparency (Attendance, books, uniforms, test scores etc.)
(ii) Data mining for effective decision making.

(3) ICT in office work—
(i) Using office packages for record maintenance and documentation,
(ii) Exchange of emails for quick and cheap communication,
(iii) Teleconferencing and video conferencing to save time and money.

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