4th सेमेस्टर पेपर 2 : शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन
यह विषय “शैक्षिक प्रबंधन एवं प्रशासन” यूपी डीएलएड (Diploma in Elementary Education) चतुर्थ सेमेस्टर के महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इस पेज पर आपको इस विषय से जुड़े पिछले 10 वर्षों के प्रश्नपत्र (Previous Year Papers), हल सहित प्रश्नपत्र (Solved Papers) तथा परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी नोट्स और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
इस विषय का प्रश्नपत्र कुल 50 अंकों का होता है और परीक्षा की अवधि 2 घंटे निर्धारित रहती है। परीक्षा में सफल होने के लिए अभ्यर्थियों को न्यूनतम 25 अंक प्राप्त करना आवश्यक होता है। प्रश्नपत्र में कुल 40 प्रश्न होते हैं, जिनका स्वरूप इस प्रकार होता है—
15 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) — प्रत्येक 1 अंक
15 अति लघु उत्तरीय प्रश्न — प्रत्येक 1 अंक
10 लघु उत्तरीय प्रश्न — प्रत्येक 2 अंक
अति लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में देने चाहिए, जबकि लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 शब्दों में लिखना उपयुक्त माना जाता है। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए उत्तर स्पष्ट, सटीक और विषय के अनुरूप होना चाहिए। केवल अधिक लिखने से अंक नहीं मिलते, बल्कि सही और व्यवस्थित उत्तर देना जरूरी होता है। इसलिए इस विषय की तैयारी के लिए मूल अवधारणाओं को समझना और नियमित अभ्यास करना अत्यंत आवश्यक है।
पाठ्यक्रम (SYLLABUS)
(अ) शैक्षिक प्रबन्धन एवं प्रशासन
★ संस्थागत नियोजन एवं प्रबन्धन का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व।
★ विद्यालय प्रबन्धन का अर्थ, आवश्यकता एवं महत्व।
★ विद्यालय प्रबन्धन के क्षेत्र।
भौतिक संसाधनों का प्रबन्धन (विद्यालय भवन, फर्नीचर, शैक्षिक उपकरण,
साज–सज्जा, पेयजल, शौचालय)।
★ मानवीय संसाधनों का प्रबन्धन
● शिक्षक,
● बच्चे,
● समुदाय (ग्राम शिक्षा समिति, विद्यालय प्रबन्ध समिति, शिक्षक–अभिभावक संघ, मातृ–शिक्षक संघ, महिला प्रेरक दल)।
★ वित्तीय प्रबन्धन (विद्यालय अनुदान, टी. एल. एम. ग्रान्ट, विद्यालय को समुदाय से प्राप्त धन, विद्यालय की सम्पत्ति से अर्जित धन, ग्राम पंचायत निधि से/जनप्रतिनिधियों से प्राप्त अनुदान)।
★ शैक्षिक प्रबन्धन (कक्षा–कक्ष प्रबन्धन, शिक्षण अधिगम सामग्री प्रबन्धन, लर्निंग कार्नर एवं पुस्तकालय प्रबन्धन, पाठ्य–पुस्तकें, कार्य–पुस्तिकाएँ, शिक्षक संदर्शिकाएँ, शब्द–कोश का प्रयोग एवं प्रबन्धन)।
★ समय प्रबन्धन (समय–सारणी का निर्माण व प्रयोग)
● एक या दो अध्यापकों वाले विद्यालयों हेतु समय–सारणी,
● तीन या चार अध्यापकों वाले विद्यालयों हेतु समय–सारणी,
● पाँच अध्यापकों वाले विद्यालयों हेतु समय–सारणी।
★ पाठ्य–सहगामी क्रियाकलापों का प्रबन्धन— खेलकूद, शैक्षिक कार्यक्रम (वाद–विवाद, निबन्ध आदि), सांस्कृतिक कार्यक्रम, राष्ट्रीय पर्व, शैक्षिक भ्रमण, बागवानी, सत्रांत समारोह)।
★ सूचनाओं एवं अभिलेखों का प्रबन्धन (विद्यालयीय सूचनाओं का संकलन, विश्लेषण एवं अभिलेखीकरण)।
★ विद्यालय अभिलेख के प्रकार –
अध्यापक उपस्थिति पंजीका
छात्र उपस्थिति पंजीका
पत्र-व्यवहार पंजीका
एस. एम. सी. पंजीका
एस.एस.सी. आय-व्यय पंजीका
ग्राम शिक्षा निधि (आय-व्यय) पंजीका
ग्राम शिक्षा समिति बैठक पंजीका
मातृ शिक्षक संघ पंजीका
अभिभावक-शिक्षक संघ पंजीका
शिक्षण अधिगम सामग्री पंजीका
स्टॉक पंजीका, निःशुल्क पुस्तक वितरण पंजीका
निःशुल्क गणवेश वितरण पंजीका
बाल गणना/ परिवार सर्वेक्षण पंजीका
बालकों के जन्मतिथि की पंजीका
स्वास्थ्य परीक्षण पंजीका
छात्रवृत्ति वितरण पंजीका
अनुसरण/निरीक्षण पंजीका, शिक्षक डायरी, वृद्धि-लेख पंजीका
एम.डी.एम. कुकिंग कॉस्ट एवं व्यय पंजीका
कार्यालय रख-रखाव पंजीका
टेंडर प्रक्रिया सम्बन्धी पंजीका
आवागमन पंजीका
आदेश पंजीका
एम.डी.एम. वितरण पंजीका
| अध्यापक उपस्थिति पंजीका | छात्र उपस्थिति पंजीका | पत्र-व्यवहार पंजीका | एस. एम. सी. पंजीका |
| एस.एस.सी. आय-व्यय पंजीका | ग्राम शिक्षा निधि (आय-व्यय) पंजीका | ग्राम शिक्षा समिति बैठक पंजीका | मातृ शिक्षक संघ पंजीका |
| अभिभावक-शिक्षक संघ पंजीका | शिक्षण अधिगम सामग्री पंजीका | स्टॉक पंजीका, निःशुल्क पुस्तक वितरण पंजीका | निःशुल्क गणवेश वितरण पंजीका |
| बाल गणना/ परिवार सर्वेक्षण पंजीका | बालकों के जन्मतिथि की पंजीका | स्वास्थ्य परीक्षण पंजीका | छात्रवृत्ति वितरण पंजीका |
| अनुसरण/निरीक्षण पंजीका, शिक्षक डायरी, वृद्धि-लेख पंजीका | एम.डी.एम. कुकिंग कॉस्ट एवं व्यय पंजीका | कार्यालय रख-रखाव पंजीका | टेंडर प्रक्रिया सम्बन्धी पंजीका |
| आवागमन पंजीका | आदेश पंजीका | एम.डी.एम. वितरण पंजीका |
★ आपदा प्रबन्धन।
★ प्रभावपूर्ण विद्यालय प्रबन्धन के सिद्धान्त— प्रजातांत्रिक प्रबन्ध, आंकड़ों का वैज्ञानिक संकलन, लक्ष्य निर्धारण तथा योजना, आवधिक निरीक्षण, तुलनात्मक आदि।
★ विद्यालय प्रबन्धन में विभिन्न अभिकरणों की भूमिका—
● प्रधानाध्यापक, शिक्षक एवं बच्चों (बाल सरकार) की भूमिका।
● समुदाय, अभिभावक (ग्राम शिक्षा समिति, शिक्षक–अभिभावक संघ, मातृ शिक्षक संघ, मीना मंच) की भूमिका।
● पर्यवेक्षण तंत्र की भूमिका— ब्लॉक संसाधन केन्द्र के समन्वयक, न्याय पंचायत संसाधन केन्द्र के प्रभारी, खण्ड शिक्षा अधिकारी, डायट मेंटर, जिला समन्वयक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं उच्च अधिकारियों की भूमिका।
(ब) प्राथमिक शिक्षा के विकास में संलग्न विभिन्न अभिकरण एवं उनकी भूमिका
(1) राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने वाले अभिकरण
उदाहरण—
● राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT),
● राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE)।
● राष्ट्रीय शैक्षिक प्रबन्धन एवं प्रशासन विश्वविद्यालय (NUEPA),
● इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU),
● राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS)।
(II) राज्य स्तर पर कार्य करने वाले अभिकरण
उदाहरण—
● राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद,
● राज्य हिन्दी संस्थान,
● मनोविज्ञानशाला,
● परीक्षा नियामक प्राधिकारी आदि।
(III) जिला स्तर पर कार्य करने वाले अभिकरण
उदाहरण—
● जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान,
● जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आदि।
(IV) स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले अभिकरण
उदाहरण—
● खण्ड शिक्षा अधिकारी,
● एन.पी.आर.सी.
(स) प्राथमिक शिक्षा का आधारभूत ढाँचा
उदाहरण—
● बेसिक शिक्षा परिषद का गठन एवं कार्य,
● बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972,
● बेसिक अध्यापक शिक्षा सेवा नियमावली,
● टी.ई.टी. नियमावली,
● सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के सामान्य नियम व प्रावधान तथा विद्यालय स्तर पर दी जाने वाली सूचनाओं की जानकारी।
Previous Year Question Papers
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