UPTET JUNIOR (CLASS 6-8) SYLLABUS IN HINDI PDF DOWNLOAD

UPTET Paper 2 Syllabus 2026 (Class 6 to 8)

UPTET JUNIOR (CLASS 6-8) SYLLABUS : UPTET (Uttar Pradesh Teacher Eligibility Test) उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने के लिए एक अनिवार्य परीक्षा है। यह परीक्षा खासतौर पर उन उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जाती है जो कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं।

कक्षा 6 से 8 (Paper 2) के लिए UPTET का सिलेबस काफी व्यापक और गहराई वाला होता है, क्योंकि इसमें केवल विषय ज्ञान ही नहीं बल्कि Teaching Methodology, Child Psychology और Learning Process को भी समझना जरूरी होता है।

इस लेख में हम आपको UPTET Paper 2 के सिलेबस को आसान भाषा में समझाएंगे, लेकिन अभी हम सिर्फ इसकी समझ, महत्व और तैयारी की रणनीति पर बात करेंगे — पूरा सिलेबस आगे अलग-अलग भागों में कवर करेंगे।

UPTET Paper 2 Exam Pattern

UPTET JUNIOR (CLASS 6-8) Syllabus

📊 परीक्षा का स्तर और प्रकृति

UPTET Paper 2 का स्तर सामान्यतः Upper Primary (Class 6–8) के अनुसार होता है, लेकिन इसमें कुछ प्रश्न conceptual और application-based भी होते हैं।

  • सभी प्रश्न MCQ (Multiple Choice Questions) होते हैं

  • प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होता है

  • Negative Marking नहीं होती

  • कुल समय: 2 घंटे 30 मिनट

  • कुल प्रश्न: 150

UPTET JUNIOR (CLASS 6-8) Syllabus Download Pdf

यहाँ पर UPTET JUNIOR (CLASS 6-8) Syllabus का pdf दिया गया है, जिसे नीचे दिए गए Download Now बटन पर क्लिक कर के आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी तैयारी को बेहतर बना सकते हैं।

I. बाल विकास एवं शिक्षण विधियाँ (Child Development & Pedagogy)

(क) विषय-वस्तु

  1. बाल विकास:
  • बाल विकास का अर्थ, आवश्यकता तथा क्षेत्र, बाल विकास की अवस्थाएं, शारीरिक विकास, मानसिक विकास, संवेगात्मक विकास, भाषा विकास।
  • अभिव्यक्ति क्षमता का विकास, सृजनात्मकता एवं सृजनात्मक क्षमता का विकास。
  • बाल विकास के आधार एवं उनको प्रभावित करने वाले कारक: वंशानुक्रम और वातावरण (पारिवारिक, सामाजिक, विद्यालयी, संचार माध्यम)।
  1. सीखने का अर्थ तथा सिद्धान्त:
  • अधिगम (सीखने) का अर्थ, इसे प्रभावित करने वाले कारक और अधिगम की प्रभावशाली विधियाँ।
  • अधिगम के नियम: थार्नडाइक के सीखने के मुख्य नियम एवं अधिगम में उनका महत्व।
  • अधिगम के प्रमुख सिद्धान्त और कक्षा शिक्षण में इनकी व्यावहारिक उपयोगिता:
    • थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धान्त।
    • पैवलव का सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त।
    • स्किनर का क्रिया प्रसूत अधिगम सिद्धान्त।
    • कोहलर का सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धान्त।
    • प्याजे का सिद्धान्त और व्योगात्स्की का सिद्धान्त।
  • सीखने का वक्र (अर्थ एवं प्रकार) और सीखने में पठार का अर्थ, कारण एवं निराकरण。
  1. शिक्षण एवं शिक्षण विधाएँ:
  • शिक्षण का अर्थ तथा उद्देश्य, सम्प्रेषण, शिक्षण के सिद्धान्त, शिक्षण के सूत्र और शिक्षण प्रविधियाँ।
  • शिक्षण की नवीन विधाएं (उपागम), सूक्ष्म शिक्षण (Micro-teaching) एवं शिक्षण के आधारभूत कौशल।
  1. समावेशी शिक्षा – निर्देशन एवं परामर्श:
  • शैक्षिक समावेशन: अर्थ, पहचान, प्रकार और निराकरण (जैसे वंचित वर्ग, भाषा, धर्म, जाति, लिंग, शारीरिक और मानसिक अक्षमता वाले बच्चे)।
  • समावेशन के लिए आवश्यक उपकरण, सामग्री, विधियाँ, टी.एल.एम. (TLM) एवं अभिवृत्तियाँ।
  • समावेशित बच्चों का अधिगम जाँचने हेतु आवश्यक टूल्स एवं तकनीकी और विशेष शिक्षण विधियाँ (जैसे ब्रेललिपि)।
  • निर्देशन एवं परामर्श: अर्थ, उद्देश्य, प्रकार, विधियाँ, आवश्यकता एवं क्षेत्र।
  • परामर्श में सहयोग देने वाली संस्थाएँ जैसे: मनोविज्ञानशाला (प्रयागराज), मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र, जिला चिकित्सालय, डायट (DIET) में प्रशिक्षित मेंटर आदि।
  • बाल-अधिगम में निर्देशन एवं परामर्श का महत्व।

(ख) अध्ययन और अध्यापन (Learning and Pedagogy)

  • बालक किस प्रकार सोचते और सीखते हैं: बालक विद्यालय प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में कैसे और क्यों ‘असफल’ होते हैं।
  • शिक्षण और अधिगम की बुनियादी प्रक्रियाएं, बालकों की अध्ययन कार्यनीतियां और सामाजिक क्रियाकलाप के रूप में अधिगम।
  • एक समस्या समाधानकर्ता और एक ‘वैज्ञानिक अन्वेषक’ के रूप में बालक।
  • बालकों में अधिगम की वैकल्पिक संकल्पना और अधिगम प्रक्रिया में बालक की ‘त्रुटियों’ को समझना।
  • बोध और संवेदनाएं, प्रेरणा और अधिगम।
  • अधिगम में योगदान देने वाले कारक (निजी एवं पर्यावरणीय)

II. भाषा-1 हिन्दी

() विषयवस्तु 

  • अपठित अनुच्छेद: गद्यांश पर आधारित प्रश्न।
  • व्याकरणिक कोटियाँ: संज्ञा एवं संज्ञा के भेद, सर्वनाम एवं सर्वनाम के भेद, विशेषण एवं विशेषण के भेद, क्रिया एवं क्रिया के भेद।
  • वाच्य: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य का ज्ञान।
  • ध्वनि एवं वर्ण: हिन्दी भाषा की समस्त ध्वनियों, संयुक्ताक्षरों, संयुक्त व्यंजनों, अनुस्वार एवं चन्द्रबिन्दु में अन्तर।
  • शब्द ज्ञान: वर्णक्रम, पर्यायवाची, विपरीतार्थक (विलोम), अनेकार्थक और समानार्थी शब्द।
  • अव्यय: अव्यय के भेद।
  • वर्तनी एवं प्रयोग: अनुस्वार और अनुनासिक का प्रयोग, तथा के विभिन्न रूपों का प्रयोग।
  • वाक्य रचना: वाक्य निर्माण (सरल, संयुक्त एवं मिश्रित वाक्य) और विराम चिह्नों की पहचान व उनका उपयोग।
  • शब्द रूप: वचन, लिंग एवं काल का प्रयोग।
  • शब्दों के प्रकार: तत्सम, तद्भव, देशज एवं विदेशी शब्द।
  • शब्द निर्माण: उपसर्ग एवं प्रत्यय, शब्द युग्म, समास, समास विग्रह एवं समास के भेद।
  • लोकोक्तियाँ एवं मुहावरे: इनका अर्थ और प्रयोग।
  • क्रिया के प्रकार: सकर्मक एवं अकर्मक क्रिया।
  • सन्धि: सन्धि एवं सन्धि के भेद (स्वर, व्यंजन एवं विसर्ग सन्धियाँ)।
  • अलंकार: अनुप्रास, यमक, श्लेष, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा और अतिशयोक्ति अलंकार।

() भाषा विकास का अध्यापन (Pedagogy of Language Development)

  • अधिगम और अर्जन: भाषा सीखने और उसे ग्रहण करने की प्रक्रिया।
  • भाषा अध्यापन के सिद्धान्त: शिक्षण के विभिन्न नियम और तकनीकें।
  • सुनने और बोलने की भूमिका: भाषा का कार्य और बालक इसे एक उपकरण के रूप में कैसे प्रयोग करते हैं।
  • व्याकरण की भूमिका: मौखिक और लिखित रूप में विचारों के सम्प्रेषण के लिए व्याकरण के महत्व का विवेचन।
  • विविध कक्षा में चुनौतियाँ: एक भिन्न पृष्ठभूमि वाली कक्षा में भाषा पढ़ाने की चुनौतियाँ, भाषा की कठिनाइयाँ, त्रुटियाँ और विकार।
  • भाषा कौशल: सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना।
  • मूल्यांकन: भाषा बोधगम्यता और प्रवीणता का मूल्यांकन (सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना)।
  • अध्यापनअधिगम सामग्रियाँ: पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री और कक्षा के बहुभाषायी संसाधन।
  • उपचारात्मक अध्यापन (Remedial Teaching): सीखने में आने वाली कमियों को दूर करने के तरीके।

III. भाषा-2 ENGLISH

() विषयवस्तु

  • Unseen Passage
  • Nouns and its Kinds
  • Pronoun and its Kinds
  • Verb and its Kinds
  • Adjective and its Kinds & Degrees
  • Adverb and its Kinds
  • Preposition and its Kinds
  • Conjunction and its Kinds
  • Intersection
  • Singular and Plural
  • Subject and Predicate
  • Negative and Interrogative Sentences
  • Masculine and Feminine Gender
  • Punctuations
  • Suffix with Root words
  • Phrasal Verbs
  • Use of Somebody, Nobody, Anybody
  • Parts of Speech
  • Narration
  • Active voice and Passive voice
  • Antonyms & Synonyms
  • Use of Homophones
  • Use of request in sentences
  • Silent Letter in words

IV. भाषा-2 उर्दू

विषय-वस्तु

  • अपठित अनुच्छेद (Unseen Passage): गद्यांश पर आधारित प्रश्न।
  • ज़बान की फ़न्नी महारतें: भाषा के तकनीकी कौशलों की जानकारी।
  • असनाफ़-ए-अदब की समझ: विभिन्न साहित्यिक विधाओं जैसे— हम्द, ग़ज़ल, क़सीदा, मर्सिया, मसनवी, गीत आदि की समझ और उनके बीच के अंतर की पहचान करना।
  • शायरों और अदीबों का परिचय: विभिन्न शायरों और साहित्यकारों (अदीबों) के जीवन परिचय (हालाते-ज़िन्दगी) और उनकी रचनाओं (तसानीफ़) के बारे में जानकारी।
  • उर्दू की भूमिका: देश की साझा संस्कृति (मुश्तरका तहजीब) में उर्दू भाषा की सेवा और उसकी अहमियत से वाकिफ़ होना।
  • व्याकरण (Grammar):
    • इस्म (संज्ञा) और उसके प्रकार।
    • फ़ेल (क्रिया), सिफ़त (विशेषण), ज़मीर (सर्वनाम) की समझ।
    • तज़कीर-ओ-तानीस (लिंग भेद – स्त्रीलिंग/पुल्लिंग)।
    • तज़ाद (विलोम शब्द) की समझ।
  • इमला और एराब: शब्दों के सही हिज्जे (इमला) और एराब (जबर, ज़ेर, पेश आदि) की सही जानकारी होना।
  • मुहावरे और ज़रबुल-अमसाल: उर्दू मुहावरों और कहावतों (लोकोक्तियों) का ज्ञान।
  • सन्नतों की जानकारी: काव्य अलंकारों या कलात्मक खूबियों (सन्नतों) की पहचान।
  • सामाजिक और नैतिक समझ: राजनीतिक, सामाजिक और नैतिक मसलों के प्रति जागरूक होना और उन पर अपना नज़रिया स्पष्ट रखना

 

V. भाषा-2 संस्कृत

(क) विषय-वस्तु

  • अपठित अनुच्छेद: गद्यांश पर आधारित प्रश्न।
  • सन्धि: स्वर और व्यंजन सन्धियाँ।
  • शब्द रूप (संज्ञाएँ): पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग शब्दों की सभी विभक्तियों एवं वचनों का ज्ञान। इसमें अकारान्त, उकारान्त, ईकारान्त (तीनों लिंगों में) तथा ऋकारान्त पुल्लिंग शब्द शामिल हैं।
  • व्याकरणिक कोटियाँ: अव्यय, समास, उपसर्ग, प्रत्यय, वाच्य, कारक और अलंकार।
  • शब्द ज्ञान: पर्यायवाची और विलोम शब्द।
  • प्रयोग: लिंग, वचन और काल का प्रयोग।
  • अन्य महत्वपूर्ण विषय: सर्वनाम, विशेषण, धातु (क्रिया रूप) और संस्कृत संख्याएँ।

(ख) भाषा विकास का अध्यापन (Pedagogy of Language Development)

  • अधिगम और अर्जन: भाषा को सीखने और ग्रहण करने की प्रक्रिया।
  • भाषा अध्यापन के सिद्धान्त: शिक्षण के नियम और पद्धतियाँ।
  • सुनने और बोलने की भूमिका: भाषा का कार्य और बालक द्वारा इसे एक उपकरण के रूप में प्रयोग करना।
  • व्याकरण की भूमिका: मौखिक और लिखित रूप में विचारों के सम्प्रेषण के लिए व्याकरण के महत्व का विवेचन।
  • विविध कक्षा में चुनौतियाँ: भिन्न पृष्ठभूमि वाली कक्षा में भाषा पढ़ाने की कठिनाइयाँ, त्रुटियाँ और विकार।
  • भाषा कौशल एवं मूल्यांकन: सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना तथा इन कौशलों में प्रवीणता का मूल्यांकन।
  • अध्यापन-अधिगम सामग्री: पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री और कक्षा के बहुभाषायी संसाधन।
  • उपचारात्मक अध्यापन (Remedial Teaching): सीखने की कठिनाइयों को दूर करने हेतु शिक्षण।

VI. गणित एवं विज्ञान

  1. गणित (Mathematics)

विषय-वस्तु:

  • संख्या पद्धति एवं अंकगणित: प्राकृतिक, पूर्ण, परिमेय संख्याएँ, पूर्णांक, कोष्ठक, लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) एवं महत्तम समापवर्तक (HCF), वर्गमूल, घनमूल और घातांक।
  • बीजगणित: चर और अचर संख्याएँ, बीजीय व्यंजकों का जोड़, घटाना, गुणा, भाग, व्यंजकों की डिग्री, युगपत, वर्ग और रैखिक समीकरण, तथा सर्वसमिकाएँ।
  • ज्यामिति: समान्तर रेखाएं, त्रिभुज, चतुर्भुज की रचना, वृत्त और चक्रीय चतुर्भुज, वृत्त की स्पर्श रेखाएं और कार्तीय तल।
  • वाणिज्य गणित: अनुपात-समानुपात, प्रतिशतता, लाभ-हानि, साधारण व चक्रवृद्धि ब्याज, कर (Tax) और वस्तु विनिमय प्रणाली।
  • सांख्यिकी एवं प्रायिकता: आंकड़ों का वर्गीकरण, माध्य, माध्यिका, बहुलक, बारम्बारता, पाई एवं दण्ड चार्ट और संभावना (प्रायिकता)।
  • अन्य: बैंकिंग (मुद्रा, बिल, कैशमेमो) और क्षेत्रमिति (Mensuration)।

अध्यापन सम्बन्धी मुद्दे (Pedagogy):

  • गणितीय/तार्किक चिन्तन की प्रकृति, पाठ्यचर्या में गणित का स्थान, गणित की भाषा, सामुदायिक गणित, मूल्यांकन, शिक्षण की समस्याएं और उपचारात्मक शिक्षण।
  1. विज्ञान (Science)

विषय-वस्तु:

  • सजीव जगत: दैनिक जीवन में विज्ञान, महत्वपूर्ण खोज, रेशे एवं वस्त्र, सजीव व निर्जीव पदार्थ, जीव जगत, जन्तु एवं वनस्पतियों का वर्गीकरण, अनुकूलन, जन्तु की संरचना एवं कार्य, कोशिका से अंगतंत्र तक, सूक्ष्म जीव, और किशोरावस्था।
  • स्वास्थ्य एवं पोषण: भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं रोग, जन्तुओं और पौधों में पोषण, लाभदायक पौधे एवं जन्तु।
  • भौतिक विज्ञान: मापन, विद्युत धारा, चुम्बकत्व, गति, बल एवं यंत्र, ऊर्जा, ध्वनि, स्थिर विद्युत, प्रकाश एवं प्रकाश यंत्र।
  • रसायन विज्ञान: पदार्थ की संरचना एवं प्रकृति, पदार्थों का पृथक्करण, हमारे आस-पास के परिवर्तन (भौतिक एवं रासायनिक), अम्ल, क्षार, लवण, खनिज एवं धातु, कार्बन एवं उसके यौगिक।
  • पर्यावरण एवं अन्य: वायु (संगठन, ओजोन परत, ग्रीन हाउस प्रभाव), जल (गुण, प्रदूषण, संरक्षण), ऊष्मा एवं ताप, मानव निर्मित वस्तुएं (प्लास्टिक, कांच, साबुन), कम्प्यूटर, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत और नाइट्रोजन चक्र।

अध्यापन सम्बन्धी मुद्दे (Pedagogy):

  • विज्ञान की प्रकृति और संरचना, प्राकृतिक विज्ञान के लक्ष्य और उद्देश्य, विज्ञान को समझना और सराहना, एकीकृत दृष्टिकोण, प्रेक्षण/प्रयोग/अन्वेषण (विज्ञान की पद्धति), नवाचार, पाठ्यचर्या सामग्री/सहायता सामग्री, मूल्यांकन और उपचारात्मक शिक्षण—ये सभी विषय विज्ञान शिक्षण की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए शामिल किए गए हैं।

VII. सामाजिक अध्ययन एवं अन्य

(क) विषय-वस्तु (Subject Matter)

  1. इतिहास (History):
  • प्राचीन भारत: इतिहास जानने के स्रोत, पाषाणकालीन, ताम्र पाषाणकालीन और वैदिक संस्कृति।
  • छठी शताब्दी ईसा पूर्व का भारत, भारत के प्रारंभिक राज्य और मौर्य साम्राज्य की स्थापना।
  • मध्यकालीन भारत: मौर्योत्तर काल, गुप्त काल, राजपूत काल, पुष्यभूति वंश, दक्षिण भारत के राज्य और इस्लाम का भारत में आगमन।
  • दिल्ली सल्तनत (स्थापना, विस्तार, विघटन), मुगल साम्राज्य (संस्कृति एवं पतन)।
  • आधुनिक भारत: यूरोपीय शक्तियों का आगमन, अंग्रेजी राज्य की स्थापना और विस्तार।
  • भारत में नवजागरण, राष्ट्रवाद का उदय, स्वाधीनता आंदोलन, स्वतंत्रता प्राप्ति और भारत विभाजन।
  • स्वतंत्र भारत की चुनौतियां。
  1. नागरिक शास्त्र (Civics):
  • हम और हमारा समाज, ग्रामीण एवं नगरीय समाज और रहन-सहन।
  • ग्रामीण एवं नगरीय स्वशासन, जिला प्रशासन और हमारा संविधान
  • यातायात सुरक्षा, केंद्रीय एवं राज्य शासन व्यवस्था और भारत में लोकतंत्र।
  • देश की सुरक्षा एवं विदेश नीति, वैश्विक समुदाय एवं भारत, नागरिक सुरक्षा और दिव्यांगता
  1. भूगोल (Geography):
  • सौरमंडल में पृथ्वी, ग्लोब, पृथ्वी की गतियां और मानचित्रण।
  • पृथ्वी के चार परिमंडल, स्थलमंडल (संरचना एवं प्रमुख स्थलरूप), वायुमंडल और जलमंडल।
  • भारत का भूगोल: भौतिक स्वरूप, मृदा, वनस्पति एवं वन्य जीव, जलवायु और आर्थिक संसाधन (यातायात, व्यापार, संचार)।
  • उत्तर प्रदेश: स्थान, राजनीतिक विभाग, जलवायु, कृषि, खनिज, उद्योग, जनसंख्या और नगरीकरण।
  • संसार के प्रमुख प्राकृतिक प्रदेश, खनिज संसाधन, उद्योग, आपदा एवं आपदा प्रबंधन।
  1. पर्यावरणीय अध्ययन (Environmental Studies):
  • प्राकृतिक संसाधन एवं उनकी उपयोगिता, प्राकृतिक संतुलन और संसाधनों का उपयोग。
  • जनसंख्या वृद्धि का पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण प्रदूषण और अपशिष्ट प्रबंधन。
  • पर्यावरणविद, पुरस्कार, पर्यावरण दिवस और कैलेंडर。
  1. अन्य विषय (कौशल एवं कला):
  • गृह शिल्प/गृह विज्ञान: स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, पोषण, रोग एवं बचाव, प्राथमिक उपचार, खाद्य संरक्षण, गृह प्रबंधन, सिलाई, बुनाई और कढ़ाई कला।
  • शारीरिक शिक्षा एवं खेल: व्यायाम, योग, प्राणायाम, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल, पुरस्कार, प्राथमिक चिकित्सा और नशीले पदार्थों के दुष्परिणाम。
  • संगीत: स्वर ज्ञान, राग परिचय, लय एवं ताल का ज्ञान, वन्दना, राष्ट्रगान और भजन。
  • उद्यान विज्ञान एवं फल संरक्षण: मिट्टी, खाद-उर्वरक, सिंचाई, बाग लगाना, विद्यालय वाटिका, सब्जियों की खेती और फल परिरक्षण (जैम, जेली, अचार बनाना)।

(ख) अध्यापन सम्बन्धी मुद्दे (Pedagogy)

  • सामाजिक अध्ययन की अवधारणा और पद्धति।
  • कक्षा की प्रक्रियाएं, क्रियाकलाप और व्याख्यान।
  • विवेकशील (Critical) चिन्तन का विकास करना।
  • पूछताछ और आनुभविक साक्ष्य।
  • सामाजिक विज्ञान पढ़ाने की समस्याएं, प्रोजेक्ट कार्य और मूल्यांकन
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