शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार
D.El.Ed 3rd Semester : शैक्षिक मूल्यांकन – यह पेपर कुल 50 अंकों का होता है, जिसमें पास होने के लिए कम से कम 25 अंक लाना अनिवार्य है। यह विषय आपके लिए बिल्कुल नया है, लेकिन इसे रटने के बजाय समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यह सिर्फ सेमेस्टर एग्जाम में ही नहीं, बल्कि आगामी UPTET, CTET और Super TET जैसी शिक्षक भर्तियों में भी बहुत काम आएगा। इसलिए, अपनी नोटबुक के पहले पेज पर इस सिलेबस को जरूर नोट कर लें।
आइए विस्तार से जानते हैं कि इस पेपर के अंतर्गत हमें कौन-कौन से चैप्टर पढ़ने हैं:
- शैक्षिक मापन एवं मूल्यांकन (Educational Measurement and Evaluation) एक शिक्षक के रूप में जब हम बच्चों को पढ़ाते हैं, तो यह जानना बहुत जरूरी होता है कि बच्चे ने कितना सीखा है, जिसके लिए हम टेस्ट या परीक्षा लेते हैं। इस अध्याय में हम शैक्षिक मापन और मूल्यांकन का अर्थ, उनकी परिभाषाएं और इन दोनों के बीच के अंतर को पढ़ेंगे। इसके अलावा, हम यह भी जानेंगे कि मूल्यांकन की शैक्षिक, प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टिकोण से क्या आवश्यकता और महत्व है।
- सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation) आजकल की शिक्षा प्रणाली इसी पर आधारित है। सतत मूल्यांकन का अर्थ है बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ लगातार उनका मूल्यांकन (टेस्ट) करते रहना, ताकि उनकी कमियों को समय पर सुधारा जा सके। इस चैप्टर में हम दक्षता आधारित मूल्यांकन, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की अवधारणा, इसके महत्व और इसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
- मूल्यांकन के पक्ष (Aspects of Evaluation) यह CTET और KVS जैसे एग्जाम्स का सबसे पसंदीदा और महत्वपूर्ण टॉपिक है। मूल्यांकन के मुख्य रूप से तीन पक्ष होते हैं:
- संज्ञानात्मक पक्ष (Cognitive Domain): इसमें ज्ञान, बोध, सोचना-समझना, विश्लेषण और मूल्यांकन जैसी दिमागी गतिविधियां शामिल होती हैं।
- भावात्मक पक्ष (Affective Domain): यह बच्चों के संवेगों (Emotions), ध्यान देने और मूल्यों को ग्रहण करने से जुड़ा है।
- कौशलात्मक / क्रियात्मक पक्ष (Psychomotor Domain): इसमें बच्चों के सामाजिक कौशल, यांत्रिक कौशल, गणितीय कौशल और भाषाई कौशल का मूल्यांकन किया जाता है।
- मूल्यांकन के प्रकार (Types of Evaluation) हम बच्चों का मूल्यांकन कई प्रकार से कर सकते हैं। इस अध्याय में मौखिक परीक्षा, लिखित परीक्षा, साक्षात्कार (Interview), अवलोकन (Observation) और प्रायोगिक (Practical) विधियों के बारे में बताया गया है। मौखिक परीक्षा के जरिए यह देखा जाता है कि बच्चा अपने भावों और विचारों को किस तरह व्यक्त कर पा रहा है। साथ ही हम रचनात्मक (Formative) और योगात्मक (Summative) मूल्यांकन के बारे में भी जानेंगे।
- प्रश्न पत्र निर्माण प्रक्रिया एवं ब्लूप्रिंट (Question Paper Construction & Blueprint) एक भावी शिक्षक होने के नाते आपको बच्चों के लिए बेहतरीन प्रश्न पत्र (Question Paper) बनाना आना चाहिए। इसमें आप सीखेंगे कि अच्छे परीक्षण की विशेषताएं क्या होती हैं और ‘ब्लूप्रिंट’ कैसे तैयार किया जाता है। आपको यह भी सिखाया जाएगा कि पेपर में वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय), अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय और निबंधात्मक प्रश्नों का सही अनुपात कैसे रखा जाए ताकि बच्चों की रचनात्मकता (Creativity) बाहर आ सके।
- निदानात्मक परीक्षण एवं उपचारात्मक शिक्षण (Diagnostic and Remedial Teaching) यह शिक्षण प्रक्रिया का एक बहुत ही शानदार हिस्सा है। ‘निदान’ (Diagnosis) का मतलब है बच्चे की समस्या का पता लगाना (जैसे—बच्चा गणित या अंग्रेजी में कमजोर है)। और जब हम उस समस्या का कारण जानकर, अभ्यास (Practice) या नई विधियों के माध्यम से उस कमजोरी को दूर कर देते हैं, तो उसे ‘उपचार’ (Remedial) कहते हैं। इस चैप्टर में हम इन दोनों प्रक्रियाओं को गहराई से समझेंगे।
- क्रियात्मक शोध (Action Research) जब आप किसी स्कूल में पढ़ाने जाएंगे, तो वहां आपको कई छोटी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, 30 बच्चों की क्लास में यदि 15 बच्चे छोटी ‘इ’ या बड़ी ‘ई’ की मात्राओं में गलती करते हैं, तो यह एक समस्या है। ‘क्रियात्मक शोध’ का मूल मंत्र है—”समस्या हमारी और हल भी हमारा”। इस अध्याय में आप सीखेंगे कि विद्यालय की इन रोजमर्रा की समस्याओं का वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित तरीके से कैसे हल निकाला जाए।
- शैक्षिक नवाचार (Educational Innovation) नवाचार (Innovation) का अर्थ है शिक्षा में नए और रोचक तरीकों का इस्तेमाल करना। आज के समय में बच्चों को उबाऊ तरीके से नहीं, बल्कि कविता, कहानी, गाने या डांस के माध्यम से पढ़ाया जाता है ताकि उनकी पढ़ाई में रुचि बनी रहे। इसमें हम प्रार्थना स्थल की गतिविधियों, पाठ्य सहगामी क्रियाकलापों, विद्यालय प्रबंधन और समुदाय की सहभागिता के बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।
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