UP DELED 2nd Sem Science : लघु उत्तरीय प्रश्न 2015-2025 : आपकी परीक्षा में 60 से 70% प्रश्न हूबहू पिछले वर्षों के पेपर से ही पूछे जाते हैं। इसलिए डीएलएड के किसी भी विषय की परीक्षा को पास करने का रामबाण उपाय यही है की कम से कम उस विषय से पिछले वर्षों मे पूछे गए सभी प्रश्नों को अच्छी प्रकार से तैयार कर लिया जाए। हमने सेकेण्ड सेमेस्टर के सभी विषयों के Previous Year Question Papers अपलोड कर रखे हैं। आप इन्हे Download करके अपनी तैयारी कर सकते हैं।
आपकी परीक्षा मे तीन प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं-
3. लघु उत्तरीय प्रश्न
आपको बस इन तीनों प्रकार के Previous Year Questions को तैयार कर लेना है। वस्तुनिष्ठ और अतिलघु प्रश्नों को उनके सही उत्तर के साथ अपलोड कर दिया गया है।
UP DELED (BTC) के द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में विज्ञान एक महत्वपूर्ण विषय है। विशेष रूप से लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions) स्कोरिंग होते हैं क्योंकि ये 2 अंक के होते हैं और इनमें सटीक उत्तर लिखने पर पूरे अंक मिलने की संभावना अधिक होती है। यहाँ पर लघु उत्तरीय प्रश्न जो पिछले 10 वर्षों मे पूछे गए हैं सभी को उनके उत्तर के साथ दिया जा रहा है। आप इनका सही से अभ्यास कर लीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न : 2015
प्रश्न 12. आँधी के क्या लक्षण हैं? लिखिए।
उत्तर: आँधी के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
- आकाश का रंग बदलना: आँधी से पहले आसमान पीला, भूरा या लालिमा लिए दिखने लगता है, खासकर धूल भरी आँधी में।
- तेज़ हवा चलना: हवा की गति अचानक बहुत बढ़ जाती है, जिससे पेड़ों के पत्ते और हल्की वस्तुएँ उड़ने लगती हैं।
- तापमान में गिरावट: ठंडी हवा के तेज़ झोंके आने लगते हैं, जिससे तापमान अचानक कम हो जाता है।
- वायुदाब घट जाना: आँधी आने से पहले हवा का दाब तेजी से कम होता है।
- धूल और रेत उठना: धूल भरी आँधी में हवा के साथ बहुत ज्यादा मिट्टी और रेत उड़कर आसमान में भर जाती है।
- अंधेरा छा जाना: धूल या घने बादलों के कारण दूर की चीजें दिखाई देना बंद हो जाता है और अचानक अंधेरा हो जाता है।
- बिजली और गरज: कई बार आँधी के साथ तेज़ गरज, बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट होती है।
- बारिश या ओले गिरना: गरज-चमक वाली आँधी में अचानक तेज़ बारिश या ओलावृष्टि भी शुरू हो सकती है।
प्रश्न 13. छाया तथा उपछाया को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: छाया (Shadow)― जब किसी अपारदर्शी वस्तु को प्रकाश जाने वाले मार्ग में रख देते हैं तो वस्तु प्रकाश को आर-पार होने से रोक देती है जिससे वस्तु के दूसरी ओर प्रकाशहीन क्षेत्र बन जाता है। इस प्रकाशहीन क्षेत्र को वस्तु की छाया कहते हैं।
उपछाया (Penumbra)― वस्तु की छाया का मध्य भाग जो अधिक काला होता है प्रच्छाया (Umbra) कहलाता है तथा प्रच्छाया के चारों ओर का सीमावर्ती कम काला भाग उपछाया (Penumbra) कहलाता है।
प्रश्न 14. मेण्डलीफ की आवर्त सारणी के दोष में ‘समस्थानिकों का स्थान’ पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मेण्डलीफ की आवर्त सारणी परमाणु भार पर आधारित थी। समस्थानिकों (Isotopes) के परमाणु भार अलग-अलग होते हैं, लेकिन उनके रासायनिक गुण समान होते हैं। नियम के अनुसार उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखा जाना चाहिए था, लेकिन इससे सारणी की व्यवस्था बिगड़ जाती। इसलिए समस्थानिकों को उचित स्थान न दे पाना मेण्डलीफ की आवर्त सारणी का एक प्रमुख दोष था।
प्रश्न 15. भौतिक परिवर्तन तथा रासायनिक परिवर्तन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: भौतिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के भौतिक गुण (जैसे अवस्था, रंग) बदल जाते हैं लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता और मूल पदार्थ को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण: बर्फ का पिघलना।
रासायनिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें नया पदार्थ बनता है जिसके गुण मूल पदार्थ से भिन्न होते हैं और इसे आसानी से पलटा नहीं जा सकता। उदाहरण: दूध से दही बनना, लोहे पर जंग लगना।
प्रश्न 16. पादप कोशिका का इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप द्वारा दिखायी देने वाले चित्र को बनाइए।
उत्तर: 
प्रश्न 17. रेबीज (Rabies) रोग के लक्षण बताइए।
उत्तर: रेबीज के लक्षण:
- रोगी को पानी से डर लगता है (Hydrophobia)।
- तेज बुखार और सिरदर्द।
- गले की मांसपेशियों में ऐंठन, जिससे निगलने में कठिनाई होती है।
- रोगी अत्यधिक उत्तेजित और आक्रामक हो सकता है।
- लार अधिक बहना।
प्रश्न 18. जलीय अपरदन किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर: जल के बहाव द्वारा मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत का कटकर बह जाना जलीय अपरदन कहलाता है।
यह मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है:
- बौछार/आस्फाल अपरदन (Splash Erosion): वर्षा की बूंदों के सीधे प्रभाव से मिट्टी के कणों का बिखरना।
- परत अपरदन (Sheet Erosion): जल की पतली परत द्वारा खेत की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी का बह जाना।
- रिल अपरदन (Rill Erosion): खेत में छोटी-छोटी उँगलियों के आकार की नालियों (Rills) का बनना।
- अवनालिका अपरदन (Gully Erosion): रिल अपरदन के बढ़ने से गहरी और बड़ी खाइयाँ (Gullies) बन जाना।

लघु उत्तरीय प्रश्न : 2016
प्रश्न 12. अम्ल क्या है? अम्ल और क्षार की पारस्परिक क्रिया द्वारा लवण तथा पानी का बनना कौन-सी क्रिया है?
उत्तर: अम्ल (Acid): वे पदार्थ जो स्वाद में खट्टे होते हैं और जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन (H+) देते हैं। अम्ल कहलाते हैं। ये नीले लिटमस को लाल कर देते हैं। उदाहरण: सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)
अम्ल और क्षार की पारस्परिक क्रिया से लवण और जल बनने की क्रिया को उदासीनीकरण (Neutralization) कहते हैं।
अम्ल + क्षार → लवण + जल
प्रश्न 13. “अच्छे स्वास्थ्य के लिए सन्तुलित आहार आवश्यक है।” टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: संतुलित आहार वह आहार है जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल) उचित मात्रा में मौजूद हों। संतुलित आहार अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह आवश्यक है, क्योंकि-
- यह शरीर को कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- शरीर की वृद्धि और टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत करता है।
- रोगों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है।
- कुपोषण और उससे होने वाले रोगों से बचाता है।
प्रश्न 14. उदाहरण देते हुए स्पष्ट करें कि एक ही परिवर्तन विभिन्न परिस्थितियों में अनुकूल तथा प्रतिकूल हो सकता है?
उत्तर: हाँ, एक ही परिवर्तन परिस्थिति के अनुसार लाभदायक या हानिकारक हो सकता है।
उदाहरण: वर्षा का होना।
अनुकूल: फसल के लिए समय पर और उचित मात्रा में वर्षा होना लाभदायक है।
प्रतिकूल: यदि फसल पक कर तैयार हो, तो वही वर्षा फसल को नष्ट कर देती है, जो हानिकारक है।
दूसरा उदाहरण: जीवाणु द्वारा अपघटन (सफाई के लिए अच्छा) लेकिन भोजन का सड़ना (हानिकारक)।
प्रश्न 15. दैनिक जीवन में घर्षण बल का क्या महत्व है? उदाहरण देते हुए समझाइए।
उत्तर: घर्षण बल हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, इसके महत्व को हम निम्न उदाहरणों के माध्यम से समझ सकते हैं-
- चलना: जमीन और पैरों के बीच घर्षण के कारण ही हम बिना फिसले चल पाते हैं।
- लिखना: कागज और पेन के बीच घर्षण के कारण ही लिखना संभव है।
- आग जलाना: माचिस की तीली और सतह के बीच घर्षण से आग जलती है।
- वाहन रोकना: ब्रेक लगाने पर घर्षण के कारण ही गाड़ियाँ रुकती हैं।
- वस्तुओं को पकड़ना: घर्षण के कारण ही हम अपने हाथों से किसी भी वस्तु (जैसे गिलास, औजार) को पकड़ पाते हैं। यदि हमारे हाथ चिकने होते, तो वस्तुएँ फिसल जातीं।
प्रश्न 16. एक प्रारूपी पुष्प का चित्र बनाकर उसके अंगों के नाम लिखिए।

उत्तर: मुख्य अंग:
- बाह्यदल पुंज (Calyx): हरे रंग की बाहरी पत्तियाँ।
- दल पुंज (Corolla): रंगीन पंखुड़ियाँ।
- पुमंग (Androecium): नर जनन अंग (पुंकेसर, परागकोश)।
- जायांग (Gynoecium): मादा जनन अंग (अंडाशय, वर्तिका, वर्तिकाग्र)।
प्रश्न 17. जड़ों के मुख्य कार्य क्या है? मक्का, प्याज, सरसों तथा बैंगन में पायी जाने वाली जड़ों के नाम बताइए।
उत्तर: जड़ों के कार्य: पौधे को मिट्टी में स्थिर रखना, मिट्टी से जल और खनिज लवणों का अवशोषण करना।
जड़ों के प्रकार:
- मक्का: अपस्थानिक/झकड़ा जड़ें (Adventitious/Fibrous roots)
- प्याज: अपस्थानिक/झकड़ा जड़ें (Adventitious/Fibrous roots)
- सरसों: मूसला जड़ (Tap root)
- बैंगन: मूसला जड़ (Tap root)
प्रश्न 18. धारावाही परिनालिका से क्या अभिप्राय है? सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर: यदि किसी कुचालक बेलनाकार नलिका (जैसे गत्ते की नली) पर तांबे के विद्युतरोधी तारों को पास-पास लपेटकर कुंडली बनाई जाए, तो इसे परिनालिका (Solenoid) कहते हैं। जब इसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह एक छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है। इसके भीतर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं समांतर होती हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न : 2016 (ii)
प्रश्न 12. मनुष्य के मुख में कितने प्रकार के दाँत पाए जाते हैं? उनके नाम एवं कार्यों को संक्षेप में समझाइए।
उत्तर: मनुष्य में 4 प्रकार के दाँत होते हैं:
- कृन्तक (Incisors): भोजन को काटने/कुतरने का कार्य करते हैं। (आगे के दाँत)
- रदनक (Canines): भोजन को चीरने-फाड़ने का कार्य करते हैं। (नुकीले दाँत)
- अग्रचवर्णक (Premolars): भोजन को चबाने और पीसने का कार्य करते हैं।
- चवर्णक (Molars): भोजन को बारीक पीसने का कार्य करते हैं।
प्रश्न 13. मनुष्य के भोजन में पोषण की प्रक्रिया समझाइए। संक्षेप में विभिन्न पदों का विवरण दें।
उत्तर: पोषण की प्रक्रिया 5 चरणों में पूर्ण होती है:
- अंतर्ग्रहण (Ingestion): भोजन को मुख में लेना। पाचन की क्रिया का आरम्भ मुख से ही हो जाता है।
- पाचन (Digestion): जटिल भोज्य पदार्थों को एंजाइमों द्वारा सरल पदार्थों में तोड़ना।
- अवशोषण (Absorption): पचे हुए भोजन का रक्त में मिलना (मुख्यतः छोटी आँत में)।
- स्वांगीकरण (Assimilation): अवशोषित भोजन का शरीर की कोशिकाओं द्वारा उपयोग करना।
- बहिक्षेपण (Egestion): अपच भोजन को मल के रूप में शरीर से बाहर निकालना।
प्रश्न 14. ऊर्जा रूपान्तरण से आप क्या समझते हैं? यान्त्रिक एवं विद्युत ऊर्जा के रूपान्तरण को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में बदलना ऊर्जा रूपान्तरण कहलाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें ऊर्जा एक रूप से बदलकर दूसरे रूप में परिवर्तित हो जाती है। उदाहरण: विद्युत ऊर्जा का प्रकाश ऊर्जा में बदलना, रासायनिक ऊर्जा का ऊष्मा ऊर्जा में बदलना आदि।
यांत्रिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में रूपान्तरण: डायनेमो या जनरेटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपान्तरण: विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है (जैसे- पंखा)।
प्रश्न 15. ‘सौर-परिवार’ को सचित्र समझाइए।

उत्तर: सूर्य और उसके चारों ओर परिक्रमा करने वाले ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण), उपग्रह, धूमकेतु, उल्काएं और क्षुद्रग्रह मिलकर सौर परिवार बनाते हैं। सूर्य इसका मुखिया है और ऊर्जा का स्रोत है। सौर परिवार के मुख्य सदस्य निम्नलिखित हैं:
सूर्य – यह सौर परिवार के केंद्र में स्थित एक विशाल तारा है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है।
आठ ग्रह – बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
उपग्रह – ये अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं (जैसे पृथ्वी का चंद्रमा)।
बौने ग्रह – ये प्लूटो और सेरेस जैसे छोटे ग्रह हैं, जो ग्रहों की तरह ही सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
क्षुद्रग्रह – ये मंगल एवं बृहस्पति के बीच की कक्षाओं में स्थित छोटे आकाशीय पिंड है जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं।
धूमकेतु – ये बर्फ, धूल और चट्टानों से बने छोटे पिंड होते हैं, जो सूर्य के पास आने पर एक चमकीली पूंछ बनाते हैं।
उल्कापिंड – ये अंतरिक्ष में तैरते हुए छोटे-छोटे कण और मलबे होते हैं।
प्रश्न 16. भोजन में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? प्रोटीन की कमी से कौन-कौन से रोग हो जाते हैं?
उत्तर: भोजन में मुख्य रूप से निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक होते हैं:
- कार्बोहाइड्रेट: यह शरीर को मुख्य रूप से ऊर्जा प्रदान करते हैं।
- वसा: ये भी ऊर्जा के स्रोत हैं और अंगों की सुरक्षा करते हैं।
- प्रोटीन: ये शरीर की वृद्धि और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक हैं।
- विटामिन: ये शरीर के विभिन्न कार्यों को सुचारु रूप से चलाने और रोगों से रक्षा करने में सहायता करते हैं।
- खनिज लवण: ये हड्डियों, दाँतों और अन्य शारीरिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं (जैसे कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम)।
- रेशे या रुक्षांश: ये पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं।
- जल: यह शरीर के सभी रासायनिक क्रियाओं के लिए आवश्यक है।
प्रोटीन की कमी से बच्चों में क्वाशियोरकर और मरास्मस (सूखा रोग) नामक रोग हो जाते हैं। इसमें शरीर का विकास रुक जाता है और शरीर कमजोर हो जाता है।
प्रश्न 17. ‘आवर्त सारणी’ के किसी आवर्त (Period) में बाँए एवं दाएँ चलने पर विद्युत-धनात्मक गुण एवं धात्विक गुणों में क्या परिवर्तन होता है?
उत्तर:
- आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत-धनात्मक गुण घटता है।
- धात्विक गुण घटता है और अधात्विक गुण बढ़ता है। उदाहरण: तीसरे आवर्त में Na (सोडियम) एक प्रबल धातु है, जबकि अंत में Cl (क्लोरिन) एक अधातु है।
प्रश्न 18. खेती में प्रयुक्त कल्टीवेटर का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: कल्टीवेटर का उपयोग खेत जोतने और खरपतवार नष्ट करने में होता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न : 2017
प्रश्न 12. धातुएँ, ऑक्सीजन से अभिक्रिया करके क्या बनाती है? लिटमस-पत्र द्वारा कैसे पहचानेंगे कि अम्लीय ऑक्साइड है या भास्मिक ऑक्साइड? (रासायनिक अभिक्रिया लिखें)।
उत्तर: धातुएँ ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके धात्विक ऑक्साइड बनाती हैं, जो सामान्यतः भास्मिक (Basic) प्रकृति के होते हैं। जैसे: 4Na + O2 2Na2O (सोडियम ऑक्साइड – भास्मिक)
पहचान: इनकी प्रकृति की पहचान लिटमस परीक्षण से की जाती है। यदि ऑक्साइड पानी में घुलकर ऐसा घोल बनाए जो नीले लिटमस को लाल करे, तो वह अम्लीय ऑक्साइड है। वहीं यदि घोल लाल लिटमस को नीला कर दे, तो वह भास्मिक ऑक्साइड होता है।
प्रश्न 13. कृषि कार्य में प्रयुक्त उपकरण डिबलर एवं कल्टीवेटर की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर: डिबलर (Dibbler): इसका उपयोग खेत में बीज बोने (बुवाई) के लिए किया जाता है। यह समान दूरी और गहराई पर बीज डालता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से सब्जियों या छोटे बीजों के लिए किया जाता है, जिससे बीज की बचत होती है और पौधे एक समान दूरी पर उगते हैं।

कल्टीवेटर (Cultivator): इसका उपयोग खेत की जुताई करने, मिट्टी को भुरभुरा बनाने और खरपतवार नष्ट करने के लिए किया जाता है। यह ट्रैक्टर चालित होता है जिससे समय और श्रम की बचत होती है।
प्रश्न 14. परिवेशीय स्वच्छता एवं स्वास्थ्य में क्या सम्बन्ध है? आप परिवेश को स्वच्छ रखने में अपनी भूमिका कैसे निभाएंगे।
उत्तर: परिवेशीय स्वच्छता और स्वास्थ्य का सीधा संबंध है। स्वच्छ वातावरण स्वस्थ जीवन का आधार है। जब घर, विद्यालय, सड़कें, पानी और हवा साफ रहते हैं, तो बीमारियों का खतरा कम होता है। गंदगी, जमा पानी और कचरा मच्छर व जीवाणुओं को बढ़ाते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया, दस्त, हैजा जैसी बीमारियाँ फैलती हैं। इसलिए स्वच्छ परिवेश स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
परिवेश को स्वच्छ रखने में मेरी भूमिका
- घर, विद्यालय और आस-पास कचरा न फैलाना।
- कचरे को डस्टबिन में डालना और गीले-सूखे कचरे को अलग करना।
- पानी का जमाव न होने देना ताकि मच्छर न पनपें।
- पौधे लगाकर वातावरण को स्वच्छ रखना।
- प्लास्टिक का कम उपयोग करना और उसे पुनर्चक्रित करना।
- स्वच्छता के बारे में दूसरों को जागरूक करना।
प्रश्न 15. मानव के श्वसन अंग का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: मानव के श्वसन अंग का नामांकित चित्र-

प्रश्न 16. हम ऊर्जा का अपव्यय कहाँ-कहाँ करते हैं? ऊर्जा को संरक्षित करने के विभिन्न तरीके लिखिए।
उत्तर:
ऊर्जा का अपव्यय:
- कमरे से निकलकर पंखा-लाइट बंद न करना।
- टीवी, कूलर, गीजर जैसे उपकरणों का अनावश्यक उपयोग।
- मोटर, ट्यूबेल या गैस स्टोव को जरूरत से ज्यादा चलाना।
- पानी, पेट्रोल-डीजल और गैस का बेवजह खर्च।
- पुराने, अधिक ऊर्जा खर्च करने वाले उपकरणों का प्रयोग।
संरक्षण के तरीके:
- आवश्यकता न होने पर उपकरण बंद रखें।
- LED बल्बों का प्रयोग करें।
- सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें।
- सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों का प्रयोग करें।
- प्रेशर कुकर में खाना पकाएं।
प्रश्न 17. हमारे प्रतिदिन के भोजन में पोषक तत्वों की कमी से होने वाले किसी एक रोग का नाम, लक्षण तथा उससे बचने के उपाय लिखिए।
उत्तर: होने वाला रोग: रतौंधी (Night Blindness) – विटामिन A की कमी से।
लक्षण: कम रोशनी या रात में ठीक से दिखाई नहीं देता। आँखें शुष्क हो जाती हैं।
बचने के उपाय: भोजन में विटामिन A युक्त पदार्थ जैसे- गाजर, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध, मछली का तेल शामिल करें।
प्रश्न 18. भूकम्प आने के क्या-क्या कारण हैं? भूकंप से बचने के उपाय एवं प्रबंधन के क्या-क्या तरीके आप अपने स्तर से अपनाएंगे लिखिए।
उत्तर: भूकम्प आने के कारण:
- टेक्टोनिक प्लेटों का खिसकना – पृथ्वी की प्लेटें आपस में टकराती या खिसकती हैं, जिससे झटके पैदा होते हैं।
- ज्वालामुखी विस्फोट – ज्वालामुखी क्षेत्रों में विस्फोट के कारण भूकम्प आ सकता है।
- मानवीय गतिविधियाँ – बाँध निर्माण, खनन और भारी विस्फोट भी भूकंप का कारण बन सकते हैं।
बचने के उपाय एवं प्रबंधन:
- भूकम्परोधी मकान बनाना।
- झटके आने पर खुले मैदान में जाना।
- इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहना।
- यदि घर के अंदर हों तो तुरंत मजबूत मेज या बिस्तर के नीचे शरण लेना ।
- बिजली, गैस आदि की सप्लाई बंद कर दें (यदि सुरक्षित हो)।
- घर में प्राथमिक उपचार (First Aid Kit), टॉर्च, पानी और सूखा भोजन तैयार रखना।
- स्कूल और घर में दूसरों को भूकंप सुरक्षा के बारे में जागरूक करना।
लघु उत्तरीय प्रश्न : 2018
प्रश्न 12. प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अन्तर लिखिए।
उत्तर: प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अन्तर-
प्रकाश संश्लेषण | श्वसन |
1. यह केवल हरे पौधों में होता है | 1. यह सभी जीवों में होता है |
2. इसमें सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है | 2. इसमें प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती |
3. इसमें CO₂ और जल से भोजन बनता है | 3. इसमें भोजन का अपघटन होता है |
4. इसमें ऊर्जा संचित होती है | 4. इसमें ऊर्जा मुक्त होती है |
5. यह क्लोरोप्लास्ट में होता है | 5. यह माइटोकॉन्ड्रिया में होता है |
6. इसमें ऑक्सीजन गैस निकलती है | 6. इसमें कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है |
7. यह संश्लेषणात्मक (Anabolic) प्रक्रिया है | 7. यह अपचयी (Catabolic) प्रक्रिया है |
प्रश्न 13. लवण किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है?
उत्तर: लवण (Salt): जब कोई अम्ल और क्षार आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो जो नया यौगिक बनता है उसे लवण कहते हैं।
इस अभिक्रिया में सामान्यतः लवण और जल बनते हैं।
अम्ल + क्षार → लवण + जल
उदाहरण: HCl + NaOH → NaCl + H₂O (यहाँ NaCl एक लवण है)
लवण मुख्यत: 6 प्रकार के होते हैं-
- सामान्य लवण: जैसे- NaCl
- अम्लीय लवण: जैसे- NaHSO4
- क्षारीय लवण: जैसे- Fe(OH)2
- द्विक लवण: जैसे- K2(SO)4 ⸳ [Al2(SO)4]3 ⸳ 24H2O
- मिश्रित लवण: जैसे- CaOCl2
- संकर लवण: जैसे- K4[Fe(CN)6]
प्रश्न 14. नाभिकीय ऊर्जा क्या है? इसका उपयोग समझाइए।
उत्तर: किसी परमाणु के नाभिक के विखंडन (fission) या संलयन (fusion) से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं। उपयोग:
- विद्युत उत्पादन में (परमाणु रिएक्टरों में)।
- चिकित्सा क्षेत्र में (कैंसर उपचार)।
- पनडुब्बियों और अंतरिक्ष यानों में ईंधन के रूप में।
प्रश्न 15. सन्तुलित आहार किसे कहते हैं? हमें सन्तुलित आहार क्यों लेने चाहिए? 13/2016
उत्तर: वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल) उचित मात्रा में मौजूद हों, संतुलित आहार कहलाता है। संतुलित आहार में शरीर की वृद्धि, विकास और स्वास्थ्य रक्षा के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व उचित अनुपात में उपस्थित होते हैं । हमें सन्तुलित आहार लेना चाहिए क्योंकि:
- यह शरीर को कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- शरीर की वृद्धि और टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत करता है।
- रोगों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है।
- कुपोषण और उससे होने वाले रोगों से बचाता है।
प्रश्न 16. कोशिका क्या है? पादप तथा जन्तु कोशिका में अन्तर लिखिए।
उत्तर: कोशिका जीवन की सबसे छोटी, मूलभूत संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। कोशिका ही जीवों की वृद्धि, विभाजन और जीवन क्रियाओं का संचालन करती है।
पादप तथा जन्तु कोशिका में अन्तर
पादप कोशिका (Plant Cell) | जन्तु कोशिका (Animal Cell) |
1. कोशिका भित्ति (Cell Wall) होती है। | 1. कोशिका भित्ति नहीं होती। |
2. क्लोरोप्लास्ट (हरित लवक) होते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण होता है। | 2. क्लोरोप्लास्ट (हरित लवक) नहीं होते। |
3. बड़ी केंद्रीय रिक्तिका उपस्थित होती है। | 3. रिक्तिकाएं बहुत छोटी या अनुपस्थित होती हैं। |
4. आकार प्रायः आयताकार होता है। | 4. आकार प्रायः गोलाकार होता है। |
5. सेंट्रियोल सामान्यतः अनुपस्थित होता है। | 5. सेंट्रियोल उपस्थित होते हैं, जो कोशिका विभाजन में मदद करते हैं। |
प्रश्न 17. उत्सर्जन किसे कहते हैं? मानव के उत्सर्जन तन्त्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर: शरीर में उपापचयी क्रियाओं के फलस्वरूप बने हानिकारक और अपशिष्ट पदार्थों (जैसे यूरिया, यूरिक अम्ल) को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया उत्सर्जन कहलाती है।

मानव उत्सर्जन तंत्र में निम्नलिखित अंग शामिल होते हैं:
- वृक्क (Kidneys): संख्या में दो, ये मुख्य उत्सर्जन अंग हैं।
- मूत्रवाहिनी (Ureters): संख्या में दो, ये वृक्क से मूत्राशय तक मूत्र ले जाती हैं।
- मूत्राशय (Urinary Bladder): एक थैलीनुमा संरचना जो मूत्र को अस्थाई रूप से जमा करती है।
- मूत्रमार्ग (Urethra): वह नली जिससे मूत्र शरीर से बाहर निकलता है।
प्रश्न 18. भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन के अन्तर को उदाहरण सहित समझाइए। 15/2015
उत्तर: भौतिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के भौतिक गुण (जैसे अवस्था, रंग) बदल जाते हैं लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता और मूल पदार्थ को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण: बर्फ का पिघलना।
रासायनिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें नया पदार्थ बनता है जिसके गुण मूल पदार्थ से भिन्न होते हैं और इसे आसानी से पलटा नहीं जा सकता। उदाहरण: दूध से दही बनना, लोहे पर जंग लगना।
लघु उत्तरीय प्रश्न : 2019
प्रश्न 12. माइटोकॉण्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा गृह क्यों कहा जाता है?
उत्तर: माइटोकॉण्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन की क्रिया होती है, जिसके फलस्वरूप भोजन का ऑक्सीकरण होता है और ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है। कोशिका के सभी कार्य—जैसे वृद्धि, चलन, विभाजन और पदार्थों का परिवहन—इसी ATP पर निर्भर करते हैं। चूँकि यहाँ ऊर्जा का उत्पादन और संग्रह होता है, इसलिए इसे कोशिका का ‘पावर हाउस’ या ‘ऊर्जा गृह’ कहते हैं।
प्रश्न 13. भास्मिक ऑक्साइड किसे कहते हैं?
उत्तर: भास्मिक ऑक्साइड वे ऑक्साइड कहलाते हैं जो जल के साथ अभिक्रिया करने पर क्षार (Base) या क्षारीय विलयन बनाते हैं। ये सामान्यतः धातुओं के ऑक्साइड होते हैं। भास्मिक ऑक्साइड अम्लों के साथ अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं, इसलिए इन्हें क्षारीय प्रकृति का माना जाता है।
उदाहरण: CaO, Na₂O, K₂O.
प्रश्न 14. फसल चक्र से क्या लाभ होता है?
उत्तर: फसल चक्र से होने वाले लाभ-
1. मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना: फसल चक्र से भूमि में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता कम नहीं होती।
2. कीट और रोगों से बचाव: एक ही फसल बार-बार बोने से कीट-रोग बढ़ते हैं, परंतु फसल बदलने से उनका प्रकोप घटता है।
3. पोषक तत्वों का संतुलन: विभिन्न फसलें मिट्टी से अलग-अलग पोषक तत्व लेती हैं, जिससे किसी एक तत्व की कमी नहीं होती।
4. खरपतवार नियंत्रण: फसल के प्रकार में बदलाव से खरपतवारों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
5. मृदा संरक्षण: मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद मिलती है।
6. उत्पादन में वृद्धि: फसल चक्र अपनाने से भूमि स्वस्थ रहती है और कुल उत्पादन बढ़ता है।
प्रश्न 15. नाभिकीय ऊर्जा क्या है? इसका क्या उपयोग है? 14/2018
उत्तर: किसी परमाणु के नाभिक के विखंडन (fission) या संलयन (fusion) से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को नाभिकीय ऊर्जा कहते हैं।
उपयोग:
- विद्युत उत्पादन में (परमाणु रिएक्टरों में)।
- चिकित्सा क्षेत्र में (कैंसर उपचार)।
- पनडुब्बियों और अंतरिक्ष यानों में ईंधन के रूप में।
प्रश्न 16. सन्तुलित आहार से क्या तात्पर्य है? हमें सन्तुलित आहार क्यों लेना चाहिए? 13/2016, 15/2018
उत्तर: वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल) उचित मात्रा में मौजूद हों, संतुलित आहार कहलाता है। संतुलित आहार में शरीर की वृद्धि, विकास और स्वास्थ्य रक्षा के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व उचित अनुपात में उपस्थित होते हैं । हमें सन्तुलित आहार लेना चाहिए क्योंकि:
- यह शरीर को कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- शरीर की वृद्धि और टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत करता है।
- रोगों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है।
- कुपोषण और उससे होने वाले रोगों से बचाता है।
प्रश्न 17. प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए क्या-क्या उपाय करना चाहिए?
उत्तर: प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा के लिए सतर्कता, समय पर चेतावनी और तैयारी सबसे महत्वपूर्ण हैं। प्राकृतिक आपदा से सुरक्षा के लिए निम्न उपाय करना चाहिए-
- पूर्व चेतावनी प्रणालियों (रेडियो/TV) पर ध्यान देना चाहिए।
- आपातकालीन किट, प्राथमिक उपचार सामग्री और महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रखना चाहिए।
- मजबूत इमारतों का निर्माण करना चाहिए।
- बाढ़ और सूखा जैसी आपदाओं को रोकने हेतु वृक्षारोपण करना चाहिए।
- आपदा के समय धैर्य रखना चाहिए और सुरक्षित स्थानों पर चले जाना चाहिए।
प्रश्न 18. ऐच्छिक एवं अनैच्छिक पेशी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ऐच्छिक पेशी और अनैच्छिक पेशी के बीच मुख्य अंतर-
बिंदु | ऐच्छिक पेशी (Voluntary Muscles) | अनैच्छिक पेशी (Involuntary Muscles) |
नियंत्रण | हमारी इच्छा से काम करती हैं। | हमारी इच्छा के बिना स्वतः कार्य करती हैं। |
कार्य | शरीर को गति प्रदान करती हैं, जैसे चलना, दौड़ना, वस्तु उठाना। | आंतरिक अंगों के कार्यों को नियंत्रित करती हैं, जैसे हृदय की धड़कन और पाचन। |
थकान | जल्दी थक जाती हैं और आराम चाहिए। | थकतीं नहीं हैं और लगातार काम करती रहती हैं। |
संरचना | ये रेखित होती हैं। | ये अरेखित होती हैं। |
उदाहरण | हाथ, पैर, और चेहरे की मांसपेशियां। | आमाशय की दीवारें, आंतों की दीवारें, रक्त वाहिकाएँ। |
लघु उत्तरीय प्रश्न : 2020
प्रश्न 12. भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन में क्या अन्तर है? 15/2015, 18/2018
उत्तर: भौतिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के भौतिक गुण (जैसे अवस्था, रंग) बदल जाते हैं लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता और मूल पदार्थ को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण: बर्फ का पिघलना।
रासायनिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें नया पदार्थ बनता है जिसके गुण मूल पदार्थ से भिन्न होते हैं और इसे आसानी से पलटा नहीं जा सकता। उदाहरण: दूध से दही बनना, लोहे पर जंग लगना।
प्रश्न 13. मृदा प्रदूषण के स्त्रोत एवं प्रभाव लिखिए।
उत्तर: जब मिट्टी में हानिकारक रसायन, कचरा या कीटनाशक मिल जाते हैं तो उसे मृदा प्रदूषण कहते हैं। जिससे मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है और पौधों, जानवरों तथा मनुष्यों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
स्त्रोत | प्रभाव |
1. अत्यधिक कीटनाशकों, शाकनाशकों और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग। | 1. मिट्टी की उर्वरता कम होना, मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों का नष्ट होना और जल स्रोतों का दूषित होना। |
2. औद्योगिक अपशिष्ट जैसे- उद्योगों से निकलने वाला सीसा, पारा, कैडमियम जैसे हानिकारक रसायन। | 2. मिट्टी को विषैला बनाना, खाद्य श्रृंखला के माध्यम से मनुष्यों और पशुओं में स्वास्थ्य समस्याएं पैदा करना। |
3. शहरी कचरा जैसे- प्लास्टिक, ई-कचरा और घरेलू अपशिष्ट। | 3. मिट्टी की भौतिक संरचना को बिगाड़ना, जल निकासी में बाधा और दुर्गंध पैदा करना। |
प्रश्न 14. मनुष्य के श्वसन तन्त्र का नामांकित चित्र बनाइए। 15/2017
उत्तर: 
प्रश्न 15. प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिकाओं में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्रोकैरियोटिक कोशिका | यूकैरियोटिक कोशिका |
1. इनमें सुस्पष्ट केन्द्रक नहीं होता। | 1. इनमें सुस्पष्ट केन्द्रक होता है। |
2. केन्द्रकीय झिल्ली अनुपस्थित होती है। | 2. केन्द्रकीय झिल्ली उपस्थित होती है। |
3. कोशिकांग झिल्ली-बद्ध नहीं होते। | 3. कोशिकांग झिल्ली-बद्ध होते हैं। |
4. आकार में छोटी व सरल होती हैं। | 4. आकार में बड़ी व जटिल होती हैं। |
5. राइबोसोम्स 70 s प्रकार के होते हैं। | 5. राइबोसोम्स 80 s प्रकार के होते हैं। |
6. डीएनए न्यूक्लियोइड में पाया जाता है। | 6. डीएनए केन्द्रक में पाया जाता है। |
उदाहरण— बैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया। | उदाहरण— पादप एवं जन्तु कोशिकाएँ। |
प्रश्न 16. उत्तोलक क्या है? इसके प्रकार उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: उत्तोलक एक सरल मशीन है जो एक निश्चित बिंदु (आलम्ब) के चारों ओर घूम सकती है। इसके द्वारा कम प्रयास लगाकर भारी वस्तु को उठाया या स्थानांतरित किया जाता है। उत्तोलक तीन प्रकार के होते हैं:
- प्रथम वर्ग के उत्तोलक : इसमें आलम्ब (F) बीच में होता है। जिसके एक ओर भार (L) और दूसरी ओर प्रयास (E) लगता है।
उदाहरण: कैंची, सी-सॉ झूला, प्लास, हथौड़ी से कील निकालना। - द्वितीय वर्ग के उत्तोलक: इसमें भार (L) बीच में होता है। एक ओर प्रयास (E) और दूसरी ओर आलम्ब (F) होता है।
उदाहरण: सरौता, नींबू निचोड़ने की मशीन, एक पहिये वाली ठेलागाड़ी ।
- तृतीय वर्ग: इस वर्ग में, आयास (E), आलंब (F) और भार (L) के बीच स्थित होता है।
उदाहरण: चिमटा।
प्रश्न 17. निम्नलिखित के सूत्र एवं एक-एक उपयोग लिखिए-
(a) विरंजक चूर्ण (b) बेकिंग सोडा (c) धावन सोडा।
उत्तर: यौगिक रासायनिक सूत्र उपयोग
(a) विरंजक चूर्ण CaOCl2 पानी को कीटाणु रहित करने में।
(b) बेकिंग सोडा NaHCO3 बेकरी उद्योग में।
(c) धावन सोडा Na2CO3.10H2O कपड़े धोने में / काँच उद्योग में।
प्रश्न 18. सन्तुलित आहार क्या है? मनुष्य के लिए सन्तुलित आहार क्यों आवश्यक है? 13/2016, 15/2018, 16/2019
उत्तर: वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल) उचित मात्रा में मौजूद हों, संतुलित आहार कहलाता है। संतुलित आहार में शरीर की वृद्धि, विकास और स्वास्थ्य रक्षा के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व उचित अनुपात में उपस्थित होते हैं । मनुष्य के लिए सन्तुलित आहार आवश्यक है क्योंकि:
- यह शरीर को कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- शरीर की वृद्धि और टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत करता है।
- रोगों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है।
- कुपोषण और उससे होने वाले रोगों से बचाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न : 2022
प्रश्न 12. ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है?
उत्तर: ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, “ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।” ऊर्जा संरक्षण का नियम प्रकृति का मूल सिद्धान्त है जो बताता है कि ब्रह्माण्ड की कुल ऊर्जा हमेशा नियत रहती है। किसी भी प्रक्रिया में ऊर्जा अपना रूप बदल सकती है, लेकिन उसका कुल मात्रा कभी घटती-बढ़ती नहीं है। गणितीय रूप में:
ΔEtotal = 0 (कुल ऊर्जा में परिवर्तन शून्य)
उदाहरण:
- गिरती गेंद की स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
- बल्ब में विद्युत ऊर्जा प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में बदलती है।
प्रश्न 13. ज्वालामुखी क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर वह छिद्र या द्वार है, जिससे पिघला हुआ लावा, गैसें, राख और भाप बाहर निकलती हैं।
ज्वालामुखी मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
- सक्रिय ज्वालामुखी (Active Volcanoes): जिनमें हाल ही में विस्फोट हुआ हो।
- प्रसुप्त ज्वालामुखी (Dormant Volcanoes): जो लंबे समय से शांत हों पर भविष्य में सक्रिय हो सकते हैं।
- शांत ज्वालामुखी (Extinct Volcanoes): जिनमें विस्फोट की कोई संभावना नहीं है।
प्रश्न 14. उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय परिवर्तन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: उत्क्रमणीय परिवर्तन (Reversible Change): वे परिवर्तन जिन्हें मूल अवस्था में वापस लाया जा सकता है, उत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं। इसमें पदार्थ का रासायनिक संघटन नहीं बदलता। उदाहरण: बर्फ का पिघलना (पानी को फिर से ठंडा करके बर्फ बनाया जा सकता है)।
अनुत्क्रमणीय परिवर्तन (Irreversible Change): वे परिवर्तन जिन्हें मूल अवस्था में वापस नहीं लाया जा सकता या जिनसे नया पदार्थ बन जाता है, अनुत्क्रमणीय परिवर्तन कहलाते हैं। उदाहरण: कागज का जलना (जली हुई राख को वापस कागज में नहीं बदला जा सकता)।
प्रश्न 15. अम्ल वर्षा किन दो ऑक्साइडों के वातावरणीय जल के साथ क्रिया करके बनती है?
उत्तर: अम्ल वर्षा वातावरण में उत्सर्जित सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) के वर्षा जल के साथ अभिक्रिया करने से बनती है। ये गैसें जल में घुलकर क्रमशः सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं, जिससे वर्षा का जल अत्यधिक अम्लीय हो जाता है। यह पर्यावरण, मृदा, जल और इमारतों को हानि पहुँचाती है।
प्रश्न 16. कंकाल तन्त्र के कार्य लिखिए।
उत्तर: कंकाल तन्त्र के कार्य-
- शरीर को आकार और सहारा देना: कंकाल तंत्र शरीर को निश्चित आकार और ढांचा प्रदान करता है।
- महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करना: कोमल अंगों जैसे- हृदय, मस्तिष्क और फेफड़ों की सुरक्षा करना।
- गतिशीलता (Movement) प्रदान करना: मांसपेशियाँ हड्डियों से जुड़ी होती हैं, इसलिए हड्डियाँ शरीर की गति संभव बनाती हैं। और चलने-फिरने (गति) में सहायता करतीं हैं।
- रक्त कोशिकाओं का निर्माण: अस्थि मज्जा (Bone marrow) में लाल तथा श्वेत रक्त कणिकाओं का निर्माण होता है।
- खनिजों का भंडारण: हड्डियों में कैल्शियम व फॉस्फोरस जैसे खनिज जमा रहते हैं।
प्रश्न 17. मृदा अपरदन से आप क्या समझते हैं? इसके कारण एवं रोकने के उपायों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मृदा अपरदन वह प्रक्रिया है जिसमें हवा या पानी जैसी प्राकृतिक शक्तियों द्वारा मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत कटकर, घिसकर या बहकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर चली जाती है। यह भूमि की उत्पादकता को कम कर देता है।
मृदा अपरदन के कारण
- तेज वर्षा: भारी वर्षा मिट्टी की ऊपरी परत को बहा ले जाती है।
- तेज हवाएँ: तेज हवा सूखी मिट्टी को उड़ाकर दूर ले जाती है।
- भूमि की ढलान: ढलान पर पानी तेज़ी से बहने से मिट्टी कट जाती है।
- वनों की कटाई: पेड़ों की जड़ों के अभाव में मिट्टी ढीली होकर बह जाती है।
- अति चराई: जानवरों द्वारा अत्यधिक चराई से घास नष्ट होकर मिट्टी खुली रह जाती है।
- स्थानांतरण कृषि: पेड़ जलाकर भूमि खुली छोड़ देने से मिट्टीबह जाती है।
मृदा अपरदन रोकने के उपाय
- वृक्षारोपण: ढलानों और खाली भूमि पर पेड़ लगाना।
- फसल आवरण: खेत को फसल या घास से ढककर रखना।
- मेड़बंदी: खेतों की सीमाओं पर मिट्टी की मेड़ बनाना।
- गली नियंत्रण: खाइयों में पत्थर या घास भरकर पानीका वेग कम करना।
प्रश्न 18. तन्त्रिका ऊतक का नामांकित चित्र बनाइए तथा इसके कार्य के बारे में लिखिए।
उत्तर: 
कार्य: संवेदनाओं (सूचनाओं) को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग (मस्तिष्क) तक पहुँचाना और आदेशों को मांसपेशियों तक लाना।
लघु उत्तरीय प्रश्न : 2023
प्रश्न 12. मनुष्य के मुख में कितने प्रकार के दांत पाए जाते है? 12/2016 (ii)
उत्तर: मनुष्य में 4 प्रकार के दाँत होते हैं:
- कृन्तक (Incisors): भोजन को काटने/कुतरने का कार्य करते हैं। (आगे के दाँत)
- रदनक (Canines): भोजन को चीरने-फाड़ने का कार्य करते हैं। (नुकीले दाँत)
- अग्रचवर्णक (Premolars): भोजन को चबाने और पीसने का कार्य करते हैं।
- चवर्णक (Molars): भोजन को बारीक पीसने का कार्य करते हैं।
प्रश्न 13. फसल चक्रण से क्या अभिप्राय है? 10/2016
उत्तर: किसी खेत में एक निश्चित समय में एक फसल के बाद दूसरी फसल उगाने की क्रिया को, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट न होने पाये, फसल चक्र या फसल चक्रण कहलाता है।
इससे मिट्टी के पोषक तत्व संतुलित रहते हैं, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, पोषक तत्वों की कमी नहीं होती और कीट व रोगों का प्रकोप भी कम होता है। इससे खरपतवार भी नियंत्रण में रहता है और कुल उत्पादन बढ़ता है। यह आधुनिक खेती की सबसे उपयोगी और वैज्ञानिक पद्धतियों में से एक है।
उदाहरण: एक मौसम में दलहन (चना, मूंग), दूसरे में अनाज (गेहूँ, मक्का) उगाना।
प्रश्न 14. ऊर्जा किसे कहते हैं? विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर: कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते हैं। ऊर्जा के कई प्रकार हैं—
- यांत्रिक ऊर्जा: किसी वस्तु की गति (गतिज ऊर्जा) या उसकी स्थिति (स्थितिज ऊर्जा) के कारण। जैसे—बहता पानी, गिरता पत्थर, चलती गाड़ी।
- ऊष्मीय ऊर्जा: ताप के रूप में मिलने वाली ऊर्जा, जो वस्तुओं को गर्म करती है। जैसे—आग, सूरज की गर्मी।
- विद्युत ऊर्जा: बिजली से प्राप्त ऊर्जा जो पंखा, बल्ब, मोटर आदि चलाती है।
- रासायनिक ऊर्जा: ईंधन, खाद्य पदार्थ और कोशिकाओं में संचित ऊर्जा। भोजन खाने पर शरीर को रासायनिक ऊर्जा मिलती है।
- सौर ऊर्जा: सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा जिसे सोलर पैनल द्वारा उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 15. माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा गृह क्यों कहा जाता है? 12/2019
उत्तर: माइटोकॉण्ड्रिया में कोशिकीय श्वसन की क्रिया होती है, जिसके फलस्वरूप भोजन का ऑक्सीकरण होता है और ATP के रूप में ऊर्जा मुक्त होती है। कोशिका के सभी कार्य—जैसे वृद्धि, चलन, विभाजन और पदार्थों का परिवहन—इसी ATP पर निर्भर करते हैं। चूँकि यहाँ ऊर्जा का उत्पादन और संग्रह होता है, इसलिए इसे कोशिका का ‘पावर हाउस’ या ‘ऊर्जा गृह’ कहते हैं।
प्रश्न 16. धातुओ की किन्ही चार विशेषताओं को बताइए।
उत्तर:
- धातुएँ ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।
- ताँबा और एल्युमिनियम विद्युत तारों में उपयोग होते हैं क्योंकि ये बिजली को अच्छी तरह चलाते हैं।
- लोहे की कढ़ाई जल्दी गर्म हो जाती है क्योंकि यह ऊष्मा की सुचालक है।
- इनमें धात्विक चमक होती है।
- सोना, चाँदी और ताँबा चमकदार होते हैं, इसलिए आभूषण व सिक्के बनाए जाते हैं।
- ये आघातवर्धनीय होती हैं। अर्थात् इन्हें पीटकर पतली-पतली चादरें बनाई जा सकती हैं।
- एल्युमिनियम को पीटकर फॉयल बनाया जाता है।
- ये तन्य होती हैं। अर्थात् इनसे लंबे और पतले तार खींचे जा सकते हैं।
- जैसे- ताँबे का तार, एल्युमिनियम तार।
प्रश्न 17. ध्वनि प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को समझाइए।
उत्तर: ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक और अवांछित शोर से होने वाला प्रदूषण है जो मानव एवं पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। तेज आवाजें जैसे—लाउडस्पीकर, वाहन हॉर्न, मशीनें, पटाखे—लंबे समय तक सुनने पर कई समस्याएँ पैदा करती हैं। इसके प्रभावों में सुनने की क्षमता में कमी, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन बढ़ना, तनाव, अनिद्रा और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। लगातार तेज आवाजें मानसिक शांति भंग करती हैं और बच्चों की पढ़ाई व एकाग्रता पर बुरा असर डालती हैं। अस्पताल, स्कूल और घर जैसे शांत क्षेत्रों में यह विशेष रूप से हानिकारक सिद्ध होता है।
प्रश्न 18. सौर परिवार को सचित्र समझाइए। 15/2016 (ii)
उत्तर: सूर्य और उसके चारों ओर परिक्रमा करने वाले ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण), उपग्रह, धूमकेतु, उल्काएं और क्षुद्रग्रह मिलकर सौर परिवार बनाते हैं। सूर्य इसका मुखिया है और ऊर्जा का स्रोत है। सौर परिवार के मुख्य सदस्य निम्नलिखित हैं:
सूर्य – यह सौर परिवार के केंद्र में स्थित एक विशाल तारा है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है।
आठ ग्रह – बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण।
उपग्रह – ये अपने ग्रहों की परिक्रमा करते हैं (जैसे पृथ्वी का चंद्रमा)।
बौने ग्रह – ये प्लूटो और सेरेस जैसे छोटे ग्रह हैं, जो ग्रहों की तरह ही सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
क्षुद्रग्रह – ये मंगल एवं बृहस्पति के बीच की कक्षाओं में स्थित छोटे आकाशीय पिंड है जो सूर्य का चक्कर लगाते हैं।
धूमकेतु – ये बर्फ, धूल और चट्टानों से बने छोटे पिंड होते हैं, जो सूर्य के पास आने पर एक चमकीली पूंछ बनाते हैं।
उल्कापिंड – ये अंतरिक्ष में तैरते हुए छोटे-छोटे कण और मलबे होते हैं।

लघु उत्तरीय प्रश्न : 2025
प्रश्न 12. संतुलित आहार क्या है? हमें सन्तुलित आहार क्यों लेना चाहिए? 13/2016, 15/2018, 16/2019, 18/2020
उत्तर: वह आहार जिसमें शरीर की आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल) उचित मात्रा में मौजूद हों, संतुलित आहार कहलाता है। संतुलित आहार में शरीर की वृद्धि, विकास और स्वास्थ्य रक्षा के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व उचित अनुपात में उपस्थित होते हैं । हमें सन्तुलित आहार लेना चाहिए क्योंकि:
- यह शरीर को कार्य करने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।
- शरीर की वृद्धि और टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत करता है।
- रोगों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाता है।
- कुपोषण और उससे होने वाले रोगों से बचाता है।
प्रश्न 13. भौतिक तथा रासायनिक परिवर्तन में क्या अन्तर है? 15/2015, 18/2018, 12/2020
उत्तर: भौतिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें पदार्थ के भौतिक गुण (जैसे अवस्था, रंग) बदल जाते हैं लेकिन कोई नया पदार्थ नहीं बनता और मूल पदार्थ को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। उदाहरण: बर्फ का पिघलना।
रासायनिक परिवर्तन: वह परिवर्तन जिसमें नया पदार्थ बनता है जिसके गुण मूल पदार्थ से भिन्न होते हैं और इसे आसानी से पलटा नहीं जा सकता। उदाहरण: दूध से दही बनना, लोहे पर जंग लगना।
प्रश्न 14. आयनन सिद्धान्त के आधार पर अम्ल एवं क्षारक को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: आरहेनियस के आयनन सिद्धांत के अनुसार:
अम्ल: वे पदार्थ जो जलीय विलयन में टूटकर हाइड्रोजन आयन (H+) देते हैं।
जैसे- HCl H+ + Cl–
क्षार: वे पदार्थ जो जलीय विलयन में टूटकर हाइड्रॉक्सिल आयन (OH–) देते हैं।
जैसे- NaOH Na+ + OH–
प्रश्न 15. आर्थिक महत्व के आधार पर फसलों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
उत्तर: फसलों को उनके आर्थिक महत्व के आधार पर तीन मुख्य वर्गों में बाँटा जाता है—
1. खाद्य फसलें (Food Crops) : ये फसलें मानव उपभोग के लिए उगाई जाती हैं और भोजन का मुख्य स्रोत हैं। इनमें अनाज, दालें तथा कुछ सब्जियाँ/फल शामिल हैं।
उदाहरण: गेहूँ, चावल, मक्का, चना, अरहर, आलू आदि।
2. नकदी फसलें (Cash Crops) : इन फसलों को मुख्यतः बिक्री और आय प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाया जाता है।
उदाहरण: गन्ना, कपास, चाय, कॉफी, तंबाकू, मूंगफली, सरसों आदि।
3. औद्योगिक फसलें (Industrial Crops) : ये फसलें विभिन्न उद्योगों के कच्चे माल के रूप में प्रयोग होती हैं, जैसे वस्त्र, कागज, शुगर, औषधि आदि।
उदाहरण: जूट, सन, गन्ना, चुकंदर, रबड़, पटसन, एलोवेरा आदि।
प्रश्न 16. ऊर्जा संरक्षण का नियम क्या है? 12/2022
उत्तर: ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, “ऊर्जा न तो उत्पन्न की जा सकती है और न ही नष्ट की जा सकती है। इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है।” ऊर्जा संरक्षण का नियम प्रकृति का मूल सिद्धान्त है जो बताता है कि ब्रह्माण्ड की कुल ऊर्जा हमेशा नियत रहती है। किसी भी प्रक्रिया में ऊर्जा अपना रूप बदल सकती है, लेकिन उसका कुल मात्रा कभी घटती-बढ़ती नहीं है।
गणितीय रूप में:
ΔEtotal = 0 (कुल ऊर्जा में परिवर्तन शून्य)
उदाहरण:
- गिरती गेंद की स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदल जाती है।
- बल्ब में विद्युत ऊर्जा प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में बदलती है।
प्रश्न 17. मृदा प्रदूषण क्या है? इनके कारण एवं स्रोत, प्रभाव तथा रोकने के उपायों का वर्णन कीजिए। 13/2020
उत्तर: परिभाषा: मृदा में हानिकारक रसायन, प्लास्टिक, कीटनाशक या अपशिष्ट मिल जाने से उसकी गुणवत्ता और उर्वरता घट जाना ही मृदा प्रदूषण है।
कारण एवं स्रोत: अत्यधिक रासायनिक खाद, कीटनाशक, औद्योगिक अपशिष्ट, प्लास्टिक कचरा और अपशिष्ट जल।
प्रभाव: फसल उत्पादन में कमी, मिट्टी की संरचना नष्ट होना, भूजल प्रदूषण और मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव।
रोकथाम: जैविक खेती, अपशिष्ट का उचित निपटान, रासायनिक उपयोग में कमी, वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण तकनीकें।
प्रश्न 18. पादप कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए। 16/2015
उत्तर: पादप कोशिका-







